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गेहूँ ख़रीदी के नाम पर किसानों के ख़िलाफ़ चक्रव्यूह रच रही मध्‍य प्रदेश की भाजपा सरकार : कमलनाथ

पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा-वादे के मुताबिक गेहूं के लिए 2700 रुपए प्रति क्विंटल का दाम किसानों को नहीं दे पाने के लिए मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार माफी मांगें        

                                                                                                                                                                                                 भोपाल । मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज जारी एक बयान में कहा कि मध्‍य प्रदेश की भाजपा सरकार ने इस बार किसानों के खिलाफ ऐसा चक्रव्‍यूह रचा है कि किसान आसानी से न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य पर गेहूं बेच ही न पाएं।




भाजपा सरकार ने पहले तो बारदाने की कमी का बहाना बनाकर गेहूं खरीद की प्रक्रिया को करीब एक महीना पीछे खिसका दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि छोटे किसानों को औने-पौने दाम पर बिचौलियों को गेंहूं बेचने को मजबूर होना पड़ा।

जब गेंहूं खरीद प्रक्रिया शुरू हुई तो छोटे किसानों की स्‍लॉट बुकिंग को सैटेलाइट सर्वे का बहाना बनाकर अस्‍वीकृत कर दिया। किसान समझ ही नहीं पा रहा है कि उसके खेत में जो फसल खड़ी है, वह सैटेलाइट से अस्‍वीकृत क्‍यों हो रही है।

इसके बाद किसानों को लगातार स्‍लॉट बुकिंग में समस्‍या का सामना करना पड़ रहा है।

छोटे किसानों को इस चक्रव्‍यूह में फंसाने के बाद सरकार मझोले और बड़े किसानों के खिलाफ नया कुचक्र लेकर आई और यह व्‍यवस्‍था कर दी कि पहले 5 एकड़ से कम के किसानों का गेंहूं खरीदा जाएगा, उसके बाद दूसरे किसानों का गेंहूं खरीदा जाएगा।

सरकार को अच्‍छी तरह पता है कि छोटा किसान पहले ही बड़ी संख्‍या में बिचौलियों को गेंहूं बेच चुका है। इस तरह सरकार ने छोटे और मझोले दोनों तरह के किसानों से कम से कम गेंहूं खरीदने का तरीका निकाल लिया।                                                                                                                                                                                                                                                                                  19 लाख से अधिक एमएसपी पर गेंहूं बेचने रजिस्ट्रेशन, स्लाट बुकिंग सिर्फ 7 लाख किसानों की                                                                                           

23 अप्रैल 2026 तक के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि जहां मध्‍य प्रदेश के 19 लाख से अधिक किसानों ने एमएसपी पर गेंहूं बेचने के लिये रजिस्‍ट्रेशन कराया है, वहीं 23 अप्रैल तक करीब 7 लाख किसानों के स्‍लॉट ही बुक हो सके हैं। रजिस्‍ट्रेशन और स्‍लॉट अलॉटमेंट के बीच यह भारी अंतर खुद ही सरकार के षड़यंत्र का खुलासा करता है।

ऐसे में सरकार का यह कहना कि इस बार 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्‍य रखा गया है, एक दिखावा ही है। पिछले वर्ष ही मध्‍य प्रदेश में करीब 245 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्‍पादन हुआ था। सरकार का खुद का दावा है कि इस बार गेहूं का उत्‍पादन पिछले वर्ष से ज्‍यादा हुआ है। ऐसे में सरकार ने प्रदेश के गेहूं के कुल उत्‍पादन का एक छोटा हिस्‍सा खरीदने का ही टारगेट रखा है।

भाजपा को अच्‍छी तरह समझ लेना चाहिए कि प्रदेश का किसान उसकी चालबाजी को बखूबी समझ रहा है। मैं सरकार से मांग करता हूं कि किसानों को चक्रव्‍यूह में उलझाने के बजाय अधिकतम किसानों से गेहूं की खरीद सुनिश्चित की जाए। स्‍लॉट बुकिंग और सैटेलाइट सर्वे की दिक्‍कत दूर की जाए। और वादे के मुताबिक किसानों को 2700 रुपये क्विंटल एमएसपी न देने के लिए भाजपा किसानों से माफी मांगे।