- अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव कुणाल चौधरी ने कहा-किसानों के लिए संघर्ष करती रहेगी कांग्रेस
भोपाल। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव कुणाल चौधरी ने कहा है कि मध्यप्रदेश में एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर गेहंू सहित अन्य उपज की खरीदी नहीं हो रही है, तरह-तरह के अड़ंगे लगाए जा रहे हैं। साथ ही खाद और बीज के लिए किसान यहां से वहां भटक रहा है। ऐसे में किसानों की समस्याओं के लिए कांग्रेस आवाज उठाने के साथ ही प्रदेशभर में संघर्ष करती रहेगी।
चौधरी प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में मीडिया से रुबरु थे। साथ में मध्य प्रदेश किसान कांग्रेस के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान एवं पूर्व प्रदेश प्रवक्ता राहुल राज थे। चौधरी ने कहा कि आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार जिस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष बता रही है, वह वास्तव में किसान परेशान वर्ष बन चुका है। उन्होंने रायसेन में आयोजित कार्यक्रम को तमाशा बताते हुए कहा कि सरकार ने प्रत्येक विधानसभा में विधायकों को 5,00,000 रुपए कृषि कल्याण वर्ष के ढोल ताशे बजाने देने के दे रही है, जबकि किसान वास्तविक रूप से नुकसान और संकट में है।
पंजीयन के मुकाबले आधे से भी कम कोटा निर्धारित किया गया
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 19 लाख 4000 किसानों ने लगभग 160 लाख मीट्रिक टन गेहूं का पंजीयन कराया है, जबकि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 78 लाख मीट्रिक टन का कोटा निर्धारित किया गया है, जो 50% से भी कम है। इससे स्पष्ट है कि सरकार किसानों की पूरी उपज खरीदने की मंशा नहीं रखती। फरवरी में शुरू होने वाली खरीदी 9 अप्रैल से शुरू हुई और 13 दिन बीत चुके हैं। उन्होंने सरकारी विज्ञापन का हवाला देते हुए कहा कि लगभग 1,45,071 किसानों से 63,27,410 क्विंटल (लगभग 6.3 लाख मीट्रिक टन) गेहूं खरीदा गया है। इस गति से यदि 8 लाख मीट्रिक टन खरीदी 13 दिनों में होती है, तो 80 लाख मीट्रिक टन खरीदने में 130 दिन और 160 लाख मीट्रिक टन के लिए 260 दिन लगेंगे। जबकि खरीदी की अंतिम तिथि निकट है, इससे सरकार की मंशा पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
नए-नए नियम बनाकर किसानों को परेशान कर रही सरकार
कांग्रेस के अनुसार सरकार लगातार नए-नए नियम लागू कर किसानों को परेशान कर रही है—कभी पंजीयन, कभी सैटेलाइट सत्यापन, तो कभी अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। पराली जलाने पर तुरंत कार्रवाई होती है, लेकिन फसल नुकसान का सही आंकलन नहीं किया जाता। अभी गर्मियों में किसानों की फसलें जलने या आंधी तूफान में बर्बाद होन पर भी मुआवजा नही मिल पाता, क्योंकि समय पर सर्वे नही हो पाता है।
प्याज, लहसुन, मटर, मक्का के नहीं मिल रहे उचित दाम
किसानों को प्याज, लहसुन, मटर और मक्का जैसी फसलों के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। मक्का, जिसकी एमएसपी 2400 रुपए क्विंटल है, वह 1000 से 1200 रुपए प्रति क्विंटल में बिक रहा है। पिछले 10 वर्षों में किसान कर्ज के बोझ तले दब गया है, जबकि कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में किसानों का कर्ज माफ किया था और प्राकृतिक आपदाओं में बिना सर्वे के भी मुआवजा दिया था। कांग्रेस ने सरकार द्वारा घोषित बोनस पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि रुपए 40 बोनस केवल दिखावा है, जबकि वास्तविक नुकसान कहीं अधिक है। साथ ही खरीदी की मात्रा कम कर किसानों को और नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

अन्नदाता परेशान, सिस्टम घोटाले करने वालों पर मेहरबान
कांग्रेस नेता चौधरी ने कहा कि प्रदेश में सरकारी खरीदी व्यवस्था पूरी तरह से अव्यवस्थित और संदिग्ध हो चुकी है। अन्नदाता परेशान है और सिस्टम घोटाले करने वालों पर मेहरबान है। उन्होंने उदाहरण देते कहा कि हरदा के समृद्धि वेयरहाउस में कागजों पर केवल 577 क्विंटल खरीदी दर्ज है, जबकि मौके पर 3007 क्विंटल अधिक गेहूं पाया गया। यह स्पष्ट रूप से बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है, लेकिन प्रशासन मौन है। वहीं खिरकिया में वास्तविक किसान अपनी उपज बेचने के बाद 3 दिनों से भुगतान का इंतजार कर रहा है, और उसे सैटेलाइट सत्यापन के नाम पर फसल वापस ले जाने को कहा जा रहा है। राजगढ़ जिले की जीरापुर तहसील का गंभीर मामला उठाया। उन्होंने कहा कि यहां जो हो रहा है, वह साधारण गड़बड़ी नहीं बल्कि किसानों के साथ सुनियोजित अन्याय है। एक किसान ने नियमानुसार 8 अप्रैल को स्लॉट बुक किया, 13 अप्रैल को उपार्जन केंद्र पर गेहूं तुलाई भी करा दी। यानी किसान ने अपनी सभी जिम्मेदारियां पूरी कर दीं, लेकिन जब भुगतान की बारी आई तो रकबे का पुन: सत्यापन शेष बताकर बिल रोक दिया गया। चौधरी ने प्रश्न उठाया कि जब 10 से 22 अप्रैल के बीच स्लॉट वैध था और उसी अवधि में तुलाई हो चुकी, तो भुगतान रोकने का आधार क्या है? यदि सत्यापन करना था, तो तुलाई से पहले क्यों नहीं किया गया? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या जानबूझकर भुगतान टालने की नीति?
गेहूं की खरीदी युद्धस्तर पर शुरु करके भुगतान किया जाए
चौधरी ने सरकार से मांग की कि गेहूं की खरीदी युद्ध स्तर पर शुरू की जाए, किसानों को तत्काल भुगतान सुनिश्चित किया जाए और उनकी पूरी उपज खरीदी जाए। उन्होंने कहा कि किसान आज कर्ज में डूबा हुआ है और सरकार उत्सव मना रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। अंत में उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है और खुले बाजार को सीमित कर किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है। कांग्रेस पार्टी किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
पंजीयन के मुकाबले आधे से भी कम कोटा निर्धारित किया गया
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 19 लाख 4000 किसानों ने लगभग 160 लाख मीट्रिक टन गेहूं का पंजीयन कराया है, जबकि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 78 लाख मीट्रिक टन का कोटा निर्धारित किया गया है, जो 50% से भी कम है। इससे स्पष्ट है कि सरकार किसानों की पूरी उपज खरीदने की मंशा नहीं रखती। फरवरी में शुरू होने वाली खरीदी 9 अप्रैल से शुरू हुई और 13 दिन बीत चुके हैं। उन्होंने सरकारी विज्ञापन का हवाला देते हुए कहा कि लगभग 1,45,071 किसानों से 63,27,410 क्विंटल (लगभग 6.3 लाख मीट्रिक टन) गेहूं खरीदा गया है। इस गति से यदि 8 लाख मीट्रिक टन खरीदी 13 दिनों में होती है, तो 80 लाख मीट्रिक टन खरीदने में 130 दिन और 160 लाख मीट्रिक टन के लिए 260 दिन लगेंगे। जबकि खरीदी की अंतिम तिथि निकट है, इससे सरकार की मंशा पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
नए-नए नियम बनाकर किसानों को परेशान कर रही सरकार
कांग्रेस के अनुसार सरकार लगातार नए-नए नियम लागू कर किसानों को परेशान कर रही है—कभी पंजीयन, कभी सैटेलाइट सत्यापन, तो कभी अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। पराली जलाने पर तुरंत कार्रवाई होती है, लेकिन फसल नुकसान का सही आंकलन नहीं किया जाता। अभी गर्मियों में किसानों की फसलें जलने या आंधी तूफान में बर्बाद होन पर भी मुआवजा नही मिल पाता, क्योंकि समय पर सर्वे नही हो पाता है।
प्याज, लहसुन, मटर, मक्का के नहीं मिल रहे उचित दाम
किसानों को प्याज, लहसुन, मटर और मक्का जैसी फसलों के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। मक्का, जिसकी एमएसपी 2400 रुपए क्विंटल है, वह 1000 से 1200 रुपए प्रति क्विंटल में बिक रहा है। पिछले 10 वर्षों में किसान कर्ज के बोझ तले दब गया है, जबकि कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में किसानों का कर्ज माफ किया था और प्राकृतिक आपदाओं में बिना सर्वे के भी मुआवजा दिया था। कांग्रेस ने सरकार द्वारा घोषित बोनस पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि रुपए 40 बोनस केवल दिखावा है, जबकि वास्तविक नुकसान कहीं अधिक है। साथ ही खरीदी की मात्रा कम कर किसानों को और नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

अन्नदाता परेशान, सिस्टम घोटाले करने वालों पर मेहरबान
कांग्रेस नेता चौधरी ने कहा कि प्रदेश में सरकारी खरीदी व्यवस्था पूरी तरह से अव्यवस्थित और संदिग्ध हो चुकी है। अन्नदाता परेशान है और सिस्टम घोटाले करने वालों पर मेहरबान है। उन्होंने उदाहरण देते कहा कि हरदा के समृद्धि वेयरहाउस में कागजों पर केवल 577 क्विंटल खरीदी दर्ज है, जबकि मौके पर 3007 क्विंटल अधिक गेहूं पाया गया। यह स्पष्ट रूप से बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है, लेकिन प्रशासन मौन है। वहीं खिरकिया में वास्तविक किसान अपनी उपज बेचने के बाद 3 दिनों से भुगतान का इंतजार कर रहा है, और उसे सैटेलाइट सत्यापन के नाम पर फसल वापस ले जाने को कहा जा रहा है। राजगढ़ जिले की जीरापुर तहसील का गंभीर मामला उठाया। उन्होंने कहा कि यहां जो हो रहा है, वह साधारण गड़बड़ी नहीं बल्कि किसानों के साथ सुनियोजित अन्याय है। एक किसान ने नियमानुसार 8 अप्रैल को स्लॉट बुक किया, 13 अप्रैल को उपार्जन केंद्र पर गेहूं तुलाई भी करा दी। यानी किसान ने अपनी सभी जिम्मेदारियां पूरी कर दीं, लेकिन जब भुगतान की बारी आई तो रकबे का पुन: सत्यापन शेष बताकर बिल रोक दिया गया। चौधरी ने प्रश्न उठाया कि जब 10 से 22 अप्रैल के बीच स्लॉट वैध था और उसी अवधि में तुलाई हो चुकी, तो भुगतान रोकने का आधार क्या है? यदि सत्यापन करना था, तो तुलाई से पहले क्यों नहीं किया गया? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या जानबूझकर भुगतान टालने की नीति?
गेहूं की खरीदी युद्धस्तर पर शुरु करके भुगतान किया जाए
चौधरी ने सरकार से मांग की कि गेहूं की खरीदी युद्ध स्तर पर शुरू की जाए, किसानों को तत्काल भुगतान सुनिश्चित किया जाए और उनकी पूरी उपज खरीदी जाए। उन्होंने कहा कि किसान आज कर्ज में डूबा हुआ है और सरकार उत्सव मना रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। अंत में उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है और खुले बाजार को सीमित कर किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है। कांग्रेस पार्टी किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
