- ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) ने वीएसीएल जन सहयोग क्रेडिट को-आपरेटिव सोसायटी लिमिटेड, भोपाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की
भोपाल। फिक्स डिपाजिट और सेविंग स्कीम में जमा राशि के सिर्फ 5 साल में ही दो से तीन गुना होने का झांसा देकर भोपाल और आसपाास के 3 हजार लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी का खुलासा होने पर ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध प्र्रकोष्ठ) ने वीएसीएल जन सहयोग क्रेडिट को-आॅपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। संस्था प्रमुख ने अपने नाम से दीवानगंज में सवा करोड़ रुपए की कृषि भूमि खरीदी और मोबाइल बंद कर लिया था।
डेढ़ दर्जन से ज्यादा आरोपियों के खिलाफ दर्ज की एफआईआर
ईओडब्ल्यू ने वीएसीएल जन सहयोग क्रेडिट को-आपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के तत्कालीन अध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा, उपाध्यक्ष बीएस चौहान, उपाध्यक्ष अभिषेक शर्मा, संचालक इंद्रेश सिंह, धीरज पवार, जितेन्द्र सिंह, राकेश मालवीय, विकास गजभिए, चिरौंजी लाल मीणा, श्वेता शर्मा, संध्या सिंह, अभिषेक खरे, विजय इंगले तथा योगिता शर्मा सहित अन्य के विरुद्ध धारा 420, 409, 120-बी भा.द.वि. एवं मप्र निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2000 की धारा 6 (1) के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की है। वीएसीएल का पंजीयन मप्र सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 के अंतर्गत 3 सितंबर 2013 को किया गया था, जोकि संस्था का कार्यालय ई-6/76, हाल ए, 11 नंबर बस स्टॉप, अरेरा कॉलोनी, भोपाल में संचालित होना पाया गया। संस्था के गठन के समय राकेश कुमार शर्मा अध्यक्ष, बीएस चौहान एवं अभिषेक शर्मा उपाध्यक्ष तथा अन्य आरोपी संचालक मंडल के सदस्य नियुक्त किए गए थे।
कैश लेकर इंवेस्टर्स को जन सहयोग क्रेडिट सर्टिफिकेट थमाए
जांच में यह पाया गया कि संस्था द्वारा डेली डिपॉजिट, मासिक बचत, फिक्स डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट, मासिक आय योजना एवं विभिन्न बचत योजनाओं के माध्यम से जनता से निवेश कराया गया। निवेशकों को जन सहयोग कैश क्रेडिट सर्टिफिकेट जारी किए जाते थे, जिनमें जमा राशि, ब्याज दर, परिपक्वता तिथि एवं भुगतान राशि का उल्लेख किया जाता था। प्रचार सामग्री एवं सर्टिफिकेट के माध्यम से निवेशकों को 12 प्रतिशत या उससे अधिक ब्याज, 5 वर्ष में राशि दुगुनी अथवा तिगुनी होने तथा आकर्षक लाभ दिए जाने का आश्वासन दिया गया।
बैंक आफ बडौदा के बैंक खाते में दो करोड़ जमा हुए
जांच के दौरान बैंक आॅफ बड़ौदा, हबीबगंज शाखा, भोपाल से संस्था के बैंक खाता क्रमांक 1860080 का विवरण प्राप्त किया गया। रिकॉर्ड परीक्षण में खाते में निरंतर बड़ी मात्रा में राशि जमा होना एवं निकासी होना पाया गया। बैंक रिकॉर्ड के अनुसार लगभग 1,64,64,504/- रुपये की राशि संस्था के खाते में जमा कराई गई। जांच में यह भी पाया गया कि उक्त खाते का संचालन मुख्य रूप से संस्था के अध्यक्ष राकेश शर्मा द्वारा किया जा रहा था।
2013-14 से निवेशकों से धोखा देकर राशि जमा करवाई
जांच में विभिन्न निवेशकों एवं संस्था से जुड़े व्यक्तियों के कथन दर्ज किए गए। पीड़ित निवेशकों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों एवं प्रमाणपत्रों से यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 2013-14 से संस्था द्वारा आम नागरिकों से निवेश लेना प्रारंभ किया गया था। समयावधि पूर्ण होने के पश्चात निवेशकों द्वारा राशि वापस मांगने पर प्रारंभ में उन्हें आश्वासन दिया गया कि राशि शीघ्र लौटाई जाएगी। बाद में संस्था का कार्यालय स्थानांतरित किया गया तथा अधिकांश समय कार्यालय बंद पाया गया। जांच में यह भी पाया गया कि आरोपीगण द्वारा मोबाइल फोन बंद कर लिए गए तथा निवेशकों से संपर्क समाप्त कर दिया गया।
40 निवेशकों और कर्मचारियों के बयानों से हुए कई खुलासे
जांच के दौरान लगभग 40 निवेशकों एवं संस्था से जुड़े कर्मचारियों के कथन लिए गए। कर्मचारियों द्वारा भी यह बताया गया कि संस्था द्वारा उनके वेतन का भुगतान नहीं किया गया। कई कर्मचारियों एवं एजेंटों ने यह कथन दिया कि उनके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों से नकद एवं चेक के माध्यम से राशि जमा कराई गई थी। कुछ निवेशकों द्वारा प्रस्तुत चेक बाउंस होना भी जांच में पाया गया। शिकायत में उल्लेखित निवेशकों के अतिरिक्त अन्य पीड़ित व्यक्तियों द्वारा भी आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को आवेदन एवं निवेश प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए गए।
करीब 3 हजार निवेशकों से जमा करवाई गई राशि
जांच में यह पाया गया कि संस्था द्वारा लगभग 3000 निवेशकों से विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निवेश कराया गया। निवेशकों को संस्था की विश्वसनीयता, अधिक लाभ एवं सुरक्षित निवेश का विश्वास दिलाकर राशि जमा कराई गई। कई मामलों में संस्था से जुड़े व्यक्तियों द्वारा नौकरी दिलाने एवं कमीशन आधारित कार्य देने का प्रलोभन भी दिया गया।
जांच में प्रस्तुत दस्तावेजों से यह भी ज्ञात हुआ कि संस्था द्वारा विभिन्न स्थानों पर कार्यालय संचालित किए गए। प्रारंभिक कार्यालय 11 नंबर स्टॉप, अरेरा कॉलोनी स्थित होना पाया गया, जिसे बाद में मानसरोवर कॉम्पलेक्स, एमपी नगर क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया। जांच में पाया गया कि निवेशकों द्वारा राशि वापसी की मांग बढ़ने पर कार्यालय अधिकांश समय बंद रहने लगा।
सरगना राकेश शर्मा ने दीवानगंज जिला रायसेन और विदिश में प्रापर्टी खरीदी
जांच के दौरान कुछ दस्तावेज ऐसे भी प्राप्त हुए, जिनसे आरोपी राकेश शर्मा द्वारा संपत्ति क्रय किए जाने संबंधी जानकारी प्राप्त हुई। जांच में पाया गया कि कुछ भूमि क्रय संबंधी दस्तावेज संस्था के संचालन काल के दौरान के हैं। जांच में पाया गया कि उसने सोसायटी निर्माण के बाद वर्ष 2014 में ग्राम दीवानगंज में अपने नाम पर क्रमश: 25 लाख रुपये (दिनांक 17.02.2014) और 1 करोड़ रुपये (दिनांक 09.10.2014) की दो अचल संपत्तियां (भूमि) खरीदीं 25, 27। इसके अतिरिक्त, नगर तथा ग्राम निवेश (जिला विदिशा) से जुड़े आवासीय भूखंडीय अभिन्यास के दस्तावेज भी जांच में प्राप्त हुए हैं।
ईओडब्ल्यू ने वीएसीएल जन सहयोग क्रेडिट को-आपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के तत्कालीन अध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा, उपाध्यक्ष बीएस चौहान, उपाध्यक्ष अभिषेक शर्मा, संचालक इंद्रेश सिंह, धीरज पवार, जितेन्द्र सिंह, राकेश मालवीय, विकास गजभिए, चिरौंजी लाल मीणा, श्वेता शर्मा, संध्या सिंह, अभिषेक खरे, विजय इंगले तथा योगिता शर्मा सहित अन्य के विरुद्ध धारा 420, 409, 120-बी भा.द.वि. एवं मप्र निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2000 की धारा 6 (1) के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की है। वीएसीएल का पंजीयन मप्र सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 के अंतर्गत 3 सितंबर 2013 को किया गया था, जोकि संस्था का कार्यालय ई-6/76, हाल ए, 11 नंबर बस स्टॉप, अरेरा कॉलोनी, भोपाल में संचालित होना पाया गया। संस्था के गठन के समय राकेश कुमार शर्मा अध्यक्ष, बीएस चौहान एवं अभिषेक शर्मा उपाध्यक्ष तथा अन्य आरोपी संचालक मंडल के सदस्य नियुक्त किए गए थे।
कैश लेकर इंवेस्टर्स को जन सहयोग क्रेडिट सर्टिफिकेट थमाए
जांच में यह पाया गया कि संस्था द्वारा डेली डिपॉजिट, मासिक बचत, फिक्स डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट, मासिक आय योजना एवं विभिन्न बचत योजनाओं के माध्यम से जनता से निवेश कराया गया। निवेशकों को जन सहयोग कैश क्रेडिट सर्टिफिकेट जारी किए जाते थे, जिनमें जमा राशि, ब्याज दर, परिपक्वता तिथि एवं भुगतान राशि का उल्लेख किया जाता था। प्रचार सामग्री एवं सर्टिफिकेट के माध्यम से निवेशकों को 12 प्रतिशत या उससे अधिक ब्याज, 5 वर्ष में राशि दुगुनी अथवा तिगुनी होने तथा आकर्षक लाभ दिए जाने का आश्वासन दिया गया।
बैंक आफ बडौदा के बैंक खाते में दो करोड़ जमा हुए
जांच के दौरान बैंक आॅफ बड़ौदा, हबीबगंज शाखा, भोपाल से संस्था के बैंक खाता क्रमांक 1860080 का विवरण प्राप्त किया गया। रिकॉर्ड परीक्षण में खाते में निरंतर बड़ी मात्रा में राशि जमा होना एवं निकासी होना पाया गया। बैंक रिकॉर्ड के अनुसार लगभग 1,64,64,504/- रुपये की राशि संस्था के खाते में जमा कराई गई। जांच में यह भी पाया गया कि उक्त खाते का संचालन मुख्य रूप से संस्था के अध्यक्ष राकेश शर्मा द्वारा किया जा रहा था।
2013-14 से निवेशकों से धोखा देकर राशि जमा करवाई
जांच में विभिन्न निवेशकों एवं संस्था से जुड़े व्यक्तियों के कथन दर्ज किए गए। पीड़ित निवेशकों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों एवं प्रमाणपत्रों से यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 2013-14 से संस्था द्वारा आम नागरिकों से निवेश लेना प्रारंभ किया गया था। समयावधि पूर्ण होने के पश्चात निवेशकों द्वारा राशि वापस मांगने पर प्रारंभ में उन्हें आश्वासन दिया गया कि राशि शीघ्र लौटाई जाएगी। बाद में संस्था का कार्यालय स्थानांतरित किया गया तथा अधिकांश समय कार्यालय बंद पाया गया। जांच में यह भी पाया गया कि आरोपीगण द्वारा मोबाइल फोन बंद कर लिए गए तथा निवेशकों से संपर्क समाप्त कर दिया गया।
40 निवेशकों और कर्मचारियों के बयानों से हुए कई खुलासे
जांच के दौरान लगभग 40 निवेशकों एवं संस्था से जुड़े कर्मचारियों के कथन लिए गए। कर्मचारियों द्वारा भी यह बताया गया कि संस्था द्वारा उनके वेतन का भुगतान नहीं किया गया। कई कर्मचारियों एवं एजेंटों ने यह कथन दिया कि उनके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों से नकद एवं चेक के माध्यम से राशि जमा कराई गई थी। कुछ निवेशकों द्वारा प्रस्तुत चेक बाउंस होना भी जांच में पाया गया। शिकायत में उल्लेखित निवेशकों के अतिरिक्त अन्य पीड़ित व्यक्तियों द्वारा भी आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को आवेदन एवं निवेश प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए गए।
करीब 3 हजार निवेशकों से जमा करवाई गई राशि
जांच में यह पाया गया कि संस्था द्वारा लगभग 3000 निवेशकों से विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निवेश कराया गया। निवेशकों को संस्था की विश्वसनीयता, अधिक लाभ एवं सुरक्षित निवेश का विश्वास दिलाकर राशि जमा कराई गई। कई मामलों में संस्था से जुड़े व्यक्तियों द्वारा नौकरी दिलाने एवं कमीशन आधारित कार्य देने का प्रलोभन भी दिया गया।
जांच में प्रस्तुत दस्तावेजों से यह भी ज्ञात हुआ कि संस्था द्वारा विभिन्न स्थानों पर कार्यालय संचालित किए गए। प्रारंभिक कार्यालय 11 नंबर स्टॉप, अरेरा कॉलोनी स्थित होना पाया गया, जिसे बाद में मानसरोवर कॉम्पलेक्स, एमपी नगर क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया। जांच में पाया गया कि निवेशकों द्वारा राशि वापसी की मांग बढ़ने पर कार्यालय अधिकांश समय बंद रहने लगा।
सरगना राकेश शर्मा ने दीवानगंज जिला रायसेन और विदिश में प्रापर्टी खरीदी
जांच के दौरान कुछ दस्तावेज ऐसे भी प्राप्त हुए, जिनसे आरोपी राकेश शर्मा द्वारा संपत्ति क्रय किए जाने संबंधी जानकारी प्राप्त हुई। जांच में पाया गया कि कुछ भूमि क्रय संबंधी दस्तावेज संस्था के संचालन काल के दौरान के हैं। जांच में पाया गया कि उसने सोसायटी निर्माण के बाद वर्ष 2014 में ग्राम दीवानगंज में अपने नाम पर क्रमश: 25 लाख रुपये (दिनांक 17.02.2014) और 1 करोड़ रुपये (दिनांक 09.10.2014) की दो अचल संपत्तियां (भूमि) खरीदीं 25, 27। इसके अतिरिक्त, नगर तथा ग्राम निवेश (जिला विदिशा) से जुड़े आवासीय भूखंडीय अभिन्यास के दस्तावेज भी जांच में प्राप्त हुए हैं।
निवेश राशि को बटोर कर अचानक ताला लगाकर गायब हो गए
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा की गई जांच में उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों, बैंक रिकॉर्ड, निवेश प्रमाणपत्रों एवं पीड़ितों के कथनों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि आरोपीगण द्वारा योजनाबद्ध तरीके से आम नागरिकों से निवेश राशि प्राप्त कर उसका दुरुपयोग किया गया तथा परिपक्वता अवधि पूर्ण होने के पश्चात राशि वापस नहीं की गई। जांच में यह भी पाया गया कि निवेशकों को प्रलोभन देकर निवेश कराया गया तथा बाद में संस्था का संचालन बंद कर दिया गया।
धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओ में दर्ज की गई है एफआईआर
उपलब्ध साक्ष्यों एवं जांच में पाए गए तथ्यों के आधार पर आरोपीगण के विरुद्ध धारा 420, 409, 120-बी भारतीय दण्ड संहिता एवं मप्र निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम, 2000 की धारा 6 (1) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। प्रकरण की विवेचना जारी है तथा विवेचना के दौरान प्राप्त होने वाले तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर आगे वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
बढ़ सकती है जांच के बाद आरोपियों की संख्या
अभी एफआईआर दर्ज करके जांच शुरु की गई है। जांच के तथ्यों और सामने आने वाले सबूतों के आधार पर आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है। इसके साथ ही निवेशकर्ताओं को धोखा देकर हड़पी गई राशि से खरीदी गई संपत्ति की भी जांच के बाद प्रकरण में अटैच की जा सकती है।
-उपेंद्र कुमार जैन, महानिदेशक, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, भोपाल
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा की गई जांच में उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों, बैंक रिकॉर्ड, निवेश प्रमाणपत्रों एवं पीड़ितों के कथनों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि आरोपीगण द्वारा योजनाबद्ध तरीके से आम नागरिकों से निवेश राशि प्राप्त कर उसका दुरुपयोग किया गया तथा परिपक्वता अवधि पूर्ण होने के पश्चात राशि वापस नहीं की गई। जांच में यह भी पाया गया कि निवेशकों को प्रलोभन देकर निवेश कराया गया तथा बाद में संस्था का संचालन बंद कर दिया गया।
धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओ में दर्ज की गई है एफआईआर
उपलब्ध साक्ष्यों एवं जांच में पाए गए तथ्यों के आधार पर आरोपीगण के विरुद्ध धारा 420, 409, 120-बी भारतीय दण्ड संहिता एवं मप्र निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम, 2000 की धारा 6 (1) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। प्रकरण की विवेचना जारी है तथा विवेचना के दौरान प्राप्त होने वाले तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर आगे वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
बढ़ सकती है जांच के बाद आरोपियों की संख्या
अभी एफआईआर दर्ज करके जांच शुरु की गई है। जांच के तथ्यों और सामने आने वाले सबूतों के आधार पर आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है। इसके साथ ही निवेशकर्ताओं को धोखा देकर हड़पी गई राशि से खरीदी गई संपत्ति की भी जांच के बाद प्रकरण में अटैच की जा सकती है।
-उपेंद्र कुमार जैन, महानिदेशक, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, भोपाल
