- मध्य प्रदेश प्राइवेट ट्रांसपोर्ट मजदूर महासघ( भारतीय मजदूर संघ) का महाआंदोलन भोपाल मे
भोपाल। सोमवार को भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में कोहेफिजा थाने के पास ब्रिज के नीचे एकत्रित होकर धरना प्रदर्शन करके रैली निकाल कर कलेक्ट्रेट पहुंच कर मुख्यमंत्री के नाम मध्य प्रदेश प्राइवेट ट्रांसपोर्ट मजदूर महासघ प्रदेश प्रभारी राजन नायर ट्रांसपोर्ट राष्ट्रीय मंत्री युगराज राणावत ट्रांसपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष योगेश शर्मा ट्रांसपोर्ट प्रदेश महामंत्री हरि सिंह रघुवंशी द्वारा ज्ञापन का वचन कर ज्ञापन सोपा गया इस मौके पर भारतीय मजदूर संघ जिला मंत्री भोपाल रघुराज दागी भोपाल टैक्सी चालक संघ के महामंत्री राजेश नांगिल रविंद्र रघुवंशी विजय जैन वीरेंद्र त्रिपाठी बल्लू ठाकुर बनवारी धाकड़े लक्ष्मी नारायण रजक आदि उपस्थित रहे।

अतः अपनी मांगे
1. चालक प्रचालक कल्याण बोर्ड की पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह के द्वारा 21.07.2014 को चालकों की महापंचायत बुलाकर घोषणा की थी जिसका आज दिनांक तक क्रियान्वन नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री जी से आग्रह है कि इसका जल्द से जल्द क्रियान्वन करें जिससे चालकों को इसका लाभ प्राप्त हो।
2. जिलों में सड़क सुरक्षा समिति की जो बैठक होती हैं जिसकी अध्यक्षताक्षेत्रीय सांसद व जिला कलेक्टर की उपस्थिति में की जाती है, उस बैठक में परिवहन क्षेत्र से भारतीय मजदूर संघ के प्रतिनिधियों को अवश्य बुलाया जाए। जिससे वह भी अपना पक्ष व सुझाव बैठक में रख सकें।
3. प्रदेश के उन जिलों में जहाँ 5 लाख से अधिक आबादी हैं उन शहरों में ऑटो रिक्शा परमिट की अस्थायी रोक लगाई जाए। जिससे ट्रेफिक जाम और शहरी प्रदूषण की समस्याओं से बचा जाए। अन्य राज्यों में यह व्यवस्था लागू है।
4. सभी चालकों को ई-श्रम, आयुष्मान योजना से जोड़ा जाए।
5. समी चालकों के ऑनलाइन चालान माफ किये जाएँ और आर.टी.ओ. शुल्क में कमी की जाए।
6. ऑटो बीमा प्रीमियम कम किया जाए, व फाईनेंसर कम्पनियों द्वारा शोषण रोका जाए।
7. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान उपलब्ध करायें जाऐ।
8. किराया निर्धारण (मीटर रेट) संसोधित कर रू. 30 डाउन मीटर और रू. 18 प्रति किलोमीटर किया जाए।
9. सी.एन.जी. व अन्य ईधनों पर सब्सिडी दी जाए, तथा एन.सी. आर. फण्ड का उपयोग चालकों के हित में हो।
10. महिला चालकों के लिए विशेष योजना लागू की जाएँ एवं स्टेण्डों पर सुविधाऐ (सुरक्षा) दी जाएँ।
11. पुलिस एवं आर.टी.ओ. के साथ समन्वय हेतु संयुक्त समिति बनाई जाए जिसकी हर तीन माह में एक बैठक की जाए, जिससे जिलों में हो रही समस्याओं का निराकरण किया जाए।
12. चालकों के लिए 12000/- वार्षिक गारंटी को तत्काल रूप से लागू किया जाए।
13. राज्य व्यापी वाहन के परमिट तुरन्त जारी किये जाए एवं इलैक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी बढ़ाई जाए।
14. अवैध ओला, ऊबर, रेपीडो प्लेटफार्म है जो सरकार द्वारा तय किये गये किराये से कम में जो चालकों की गाड़ियाँ यात्रियों के लिए बुक कराते हैं वह जो सरकार का निर्धारित किराया है वह प्लेटफामों द्वारा दिलाया जाए। जो बाईकों के द्वारा ओला ऊबर, रेपीडो यात्रियों को सुविधा दे रहे हैं तत्काल बंद किया जाए। जिससे सरकार के राजस्व का बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है। इन बाइकों को आर.टी.ओ. के पास कोई रिकार्ड नहीं। जो पर्सनल बाईकों से धंधा करते हैं उनके द्वारा यात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी या जनहानि, लूट होती है इसकी जिम्मेदारी सरकार तय करें या बाईको को कॉमर्शियल परमिट दें।
15. इलैक्ट्रिक वाहनों के लिए एक नीति निर्धारित की जाए, जो सभी जिलों में एक समान लागू हो। अभी म.प्र. के केवल दो जिलों में ही उज्जैन व ग्वालियर में जो इलेक्ट्रिक वाहनों की जो शिफ्ट सिस्टम है, उसे समाप्त किया जाए। और इलैक्ट्रिक वाहनों की एक केटेगरी तय की जाऐ एक ही तरह के इलैक्ट्रिक वाहनों को दो जगह दर्शाया जाता है आधे ई-रिक्शा और आधे ऑटो रिक्शा। अतः उन्हें समान किया जाए।
16. परिवहन विभाग द्वारा ड्राइविंग लाईसेंस, एवं गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन कार्ड बनवाकर नहीं दिये जा रहे हैं और शुल्क लिया जा रहा है। या तो कार्ड बनाकर दिये जाएँऐं या तो शुल्क वापिस दी जाए।
17. प्रदेश में पार्किंग ठेकेदारों द्वारा गाडियों के पूरे नम्बर की पर्ची नहीं देते हैं जिसके कारण पार्किंग स्टैण्ड से कोई गाड़ी चोरी होती है या कोई विवाद होता है पर्ची पर पूरा नम्बर न होने के कारण थानों में एफ. आई. आर. नहीं होती और न्यायालय में आवेदक अपना पूरा साक्ष्य प्रस्तुत करने में असमर्थ रहता है। जिसके कारण ठेकेदारों को एक तरफा न्याय मिलता है। और आवेदकों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए ठेकेदारों को पूरी पर्ची देने का आदेश दिया जाऐ।
13. राज्य व्यापी वाहन के परमिट तुरन्त जारी किये जाए एवं इलैक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी बढ़ाई जाए।
14. अवैध ओला, ऊबर, रेपीडो प्लेटफार्म है जो सरकार द्वारा तय किये गये किराये से कम में जो चालकों की गाड़ियाँ यात्रियों के लिए बुक कराते हैं वह जो सरकार का निर्धारित किराया है वह प्लेटफामों द्वारा दिलाया जाए। जो बाईकों के द्वारा ओला ऊबर, रेपीडो यात्रियों को सुविधा दे रहे हैं तत्काल बंद किया जाए। जिससे सरकार के राजस्व का बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है। इन बाइकों को आर.टी.ओ. के पास कोई रिकार्ड नहीं। जो पर्सनल बाईकों से धंधा करते हैं उनके द्वारा यात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी या जनहानि, लूट होती है इसकी जिम्मेदारी सरकार तय करें या बाईको को कॉमर्शियल परमिट दें।
15. इलैक्ट्रिक वाहनों के लिए एक नीति निर्धारित की जाए, जो सभी जिलों में एक समान लागू हो। अभी म.प्र. के केवल दो जिलों में ही उज्जैन व ग्वालियर में जो इलेक्ट्रिक वाहनों की जो शिफ्ट सिस्टम है, उसे समाप्त किया जाए। और इलैक्ट्रिक वाहनों की एक केटेगरी तय की जाऐ एक ही तरह के इलैक्ट्रिक वाहनों को दो जगह दर्शाया जाता है आधे ई-रिक्शा और आधे ऑटो रिक्शा। अतः उन्हें समान किया जाए।
16. परिवहन विभाग द्वारा ड्राइविंग लाईसेंस, एवं गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन कार्ड बनवाकर नहीं दिये जा रहे हैं और शुल्क लिया जा रहा है। या तो कार्ड बनाकर दिये जाएँऐं या तो शुल्क वापिस दी जाए।
17. प्रदेश में पार्किंग ठेकेदारों द्वारा गाडियों के पूरे नम्बर की पर्ची नहीं देते हैं जिसके कारण पार्किंग स्टैण्ड से कोई गाड़ी चोरी होती है या कोई विवाद होता है पर्ची पर पूरा नम्बर न होने के कारण थानों में एफ. आई. आर. नहीं होती और न्यायालय में आवेदक अपना पूरा साक्ष्य प्रस्तुत करने में असमर्थ रहता है। जिसके कारण ठेकेदारों को एक तरफा न्याय मिलता है। और आवेदकों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए ठेकेदारों को पूरी पर्ची देने का आदेश दिया जाऐ।
18. मोटर वाहनों अधिनियम 2025 के खंड 17.3 एवं मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 67 (3) को तत्काल प्रभाव से रद्ध किया जाए। एग्रीगेटर कम्पनियों को निर्देश दिये जाएँ कि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किराया ही लागू किया जाए।
19. ऑटो, टेम्पो (विक्रम), मिनी लोडिंग वाहनों के परमिट जो 4 माह में रिन्यू होते हैं उन्हें 5 वर्ष किया जाए, जिससे चालकों को बार-बार परिवहन विभाग एवं चालानी कार्यवाहियों से बचा जाए। वाहनों के नये परमिट भी 5 बष का दिया जाए।
20. सभी चालक बंधुओं का 10 लाख का बीमा कराया जाए।
21. पर्सनल वाहनों को टोल पर जो केन्द्र की योजना के तहत जो सुविधा मिलती है। वह प्राइवेट वाहनों (कॉमर्शियल) को दी जावे।
22.कोमर्शीयल गाड़ीयों का बिमा प्रीमियम कम किया जाए और दुर्घटना मृत्यू होने पर मालिकों जो 15,00000/पन्द्रह लाख दिया जाता वहां चालकों को भी दिया जाए।
23.परिवहन क्षेत्र में आरटीओ ऑनलाइन के नाम पर चालकों को लूटा जाता है और हर रसीद पर 200 300 रुपए मांगे जाते हैं वह तत्काल बंद होना चाहिए और फीस भरने के लिए सरकारी विंडो उपलब्ध करानी चाहिए या फिर जैसे टिकट बुक करते हैं बिजली का बिल भरते हैं ऑनलाइन रिचार्ज करते हैं ऐसी सुविधाओं में कोई अन्य शुल्क य धन नहीं लगता है ऐसी कोई ऐप के माध्यम से हमारी जो कागजों के नवीनीकरण के लिए एक भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था करनी चाहिए जिससे हमारे चालक व आम आदमी शोषण बच सके ।
24.शासकीय ड्राइवर प्राइवेट ड्राइवर हमारे चालक बंधु लगे उनका 8 घंटे के बाद जो शोषण किया जाता है ड्यूटी होने के बाद ओवरटाइम लिया जाता है इसके बदले उन्हें ओवर टाइम का पैसा लक्ष्य दिया जाना चाहिए।