रेलिक रिपोर्टर, शाहजहांपुर.
केबिनेट
मंत्री अहमद हसन आशाओं के लिए दलाल शब्द का प्रयोग करते सस्ते में छूटते
नजर नहीं आ रहे हैं। अपने पूर्व निर्धारित चेतावनी के अनुसार आल इंडिया आशा
कार्यकत्री सेवा कल्याण समिति के बैनर तले जिले भर की सैकड़ों आशाओं ने
कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर नारेबाजी की। आशाएं मुख्यमंत्री को संबोधित
ज्ञापन डीएम को सौपना चाहती थीं और इसके लिए उन्होने सड़क जाम करने तक की
धमकी दे डाली थी। बाद में आशाओं ने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन दिया और 19
को फिर धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी। आशाओं ने कहा कि जब तक मंत्री जी उनको
दलाल कहने के लिए मांफी नहीं मांगते, विरोध प्रदर्शन लगातार जारी रहेगा।
दलाल कहने पर केबिनेट मंत्री अहमद हसन के खिलाफ धरना देकर सिटी मजिस्ट्रेट
को दिया ज्ञापन
जिलाध्यक्ष
कमलजीत कौर के नेतृत्व में सुबह से ही जिला भर की सैकड़ों आशा
कार्यकत्रियां कलेक्ट्रेट में एकत्र हो गईं। इसके बाद आशाओं ने जमकर
नारेबाजी की। आशाओं ने कहा कि वह मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को ही
देंगी और अगर तीन बजे तक डीएम साहब नहीं आईं तो वे सब सड़क पर बैठ जाएंगी।
चूंकि डीएम साहब तहसील दिवस में गई हुई थीं, इसलिए आशाओं की यह मुराद पूरी
नहीं हुई।
ज्ञापन में स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन द्वारा मांफी मांगने की
बात कही गई। कहा कि आशाओं के लिए एक मंत्री द्वारा दलाल शब्द का प्रयोग
करना निंदनीय है। आशाओं ने कहा कि जिला चिकित्सालय से लेकर पीएचसी सीचएसी
तक गर्भवती महिलाओं से प्रसव के नाम पर 1500 से 2500 रुपये तक सुविधा शुल्क
लिया जाता है। जो गरीब गर्भवती पैसा नहीं दे पातीं, उनकी ठीक से देखभाल
नहीं की जाती है। आशा किसी मरीज को ले जाती है तो स्टाफ सोता हुआ मिलता है।
जलालाबाद सीएचसी के डाक्टर नसमुददीन आशाओं के साथ डांट फटकार करते हैं।
वर्ष 2012-13 का पैसा सुविधा शुक्ल लेने के बाद ही देने की बात कह रहे हैं।
पैथालाजी में मधु पैसे लेकर ही रिपोर्ट देती है। कांट पीएचसी के डा.
पुष्पेंद्र आशाओं को तंग करता हैं। किसी भी मद में पैसा भेजने के लिए सौ-सौ
रुपये सुविधा शुल्क बसूलते हैं। आशाओं ने कहा कि उनका वेतन 10 से 15 हजार
रुपये किया जाना चाहिए। ड्यूटी के वक्त यदि आशा हादसे का शिकार हो जाती है
तो उसे मुआवजा दिया जाए। यदि किसी आशा की मृत्यु हो जाती है तो परिवार के
सदस्य को ही नियुक्त किया जाए। प्रदर्शन करने वालों में रेनू देवी,
सावित्री, बेबी, सर्वेश कुमारी, मंजू, नन्हीं, कुंती पांडेय, कमलेश, अरूणा
मिश्रा, मीनू श्रीवास्तव, ओम कुमारी, उर्मिला देवी, शकुंतला, अनीता,
रामादेवी, बीनू, रूपा सिंह, नीरज देवी, किरन, गीता त्रिवेदी, रूपवती,
सीमा, रतना त्रिवेदी, पिंकी, कुसुम, सावित्री, पदमा, निशा, माया, पुष्पा,
गुडडी, किरनलता, सत्यवती, अनीता सक्सेना, प्रमोद कुमारी, राधा आदि मौजूद
रहीं।
आशाओं को मिली निराशा, फिर धरने पर बैठेंगी आशा बहुएं
नवंबर 18, 2014
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