रेलिक रिपोर्टर, पेटलावद, झाबुआ.
एक
ओर प्रदेश के मुखिया शिवराजसिंह चौहान अंतिम पंक्ती में खडे आम आदमी तक
सरकारी योजना का लाभ दिलाने की बात कर रहे है तो दूसरी ओर अधिकारी कर्मचारी
हितग्राहियों को योजनाआें के लाभ से वंचित रखने में कोई कसर नही छोड रहे।
ऐसा ही कुछ नगर परिषद एक पुत्र के साथ कर रही है। योजना का लाभ लेने के लिए
वह चक्कर काट काट कर परेशान हो गया है किन्तु लाभ नही मिल रहा।
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| आवेदन लेकर भटकता चेतन |
वार्ड
क्रमांक तीन निवासी चेतन पिता गणेश परमार अपनी ही स्वर्गीय मां को मिलने
वाली जनश्री बीमे के राशी के लिए बीते दो वर्ष से नगर परिषद के चक्कर काट
रहा है। चेतन ने बताया कि उसने वर्ष 2010-11 में अपनी माता कगाबाई का
मुख्यमंत्री द्वारा चलाई गई जनश्री बीमा योजना में बीमा करवाया था। बीमा
करवाते वक्त उसे नगर परिषद द्वारा बताया गया था की माता की मृत्यु के बाद
उसे जनश्री बीमे के तहत 30 से 35 हजार रूपए बीमा राशी के रूप में दी जाएगी।
इसके बाद 19 जुलाई 2012 को अचानक चेतन की माता की मृत्यु हो गई। माता की
मृत्यु के बाद चेतन ने नगर परिषद कार्यालय पर जाकर बीमे की राशी के लिए
आवेदन दिया। लेकिन तबसे लेकर आज तक चेतन को कुछ नही मिला। परेशान चेतन ने
कई बार उच्च अधिकारियों को मामले से अवगत करवाया लेकिन कोई फायदा नही हुआ।
यहां तक की जनसुनवाई में भी चेतन ने राशी दिलाने के लिए आवेदन दिया गया।
जिसकी जांच आने पर परिषद द्वारा बता दिया गया कि चेतन पिता गणेश का कर्मकार
कल्याण योजना के अंर्तत 20 हजार रूपए का चेक प्रदान कर दिया गया है व अन्य
योजना का लाभ नही दिया जा सकता। जबकि चेतन ने जिस वक्त बीमा करवाया था तब
किसी नगर परिषद के अधिकारी ने यह बात या ऐसी कोई शर्त नही बताई थी कि एक ही
योजना का लाभ मिलेगा। 20 हजार की जो राशी दी गई वह तो मजदूरी के नाम से दी
गई न कि बीमे के रूप में।