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सांसारिक कर्मो को विरक्ति के साथ करना चाहिये

रेलिक रिपोर्टर, झाबुआ.
 
झाबुआ, 19 नवंबर निप्र. साधना के बारे में आम तौर पर लोगों का मत है कि एकांत भाव से प्रभू स्मरण करना ही साधना है। भगवान श्री सत्यसाई बाबा ने साधना का गुढ अर्थ बताया है। जप, ध्यान या भजन साधना नही है, ये केवल आध्यात्मिक क्रिया है। अभाव और अनात्म भाव ही साधना कहलाता है। हमें सांसारिक कर्मो को विरक्ति के साथ करना चाहिये। 


सांसारिक कर्मो को विरक्ति के साथ करना चाहिये

हमे खेत पर नही बल्कि खेत को जानने वाले पर ध्यान केंद्रित करना होगा। इसका अर्थ है संसार की भौतिक बातों से परे हटकर आध्यात्मिकता की भावनाओं पर स्वयं को केंद्रित करना चाहिये। उक्त उद्बोधन श्री सत्यसाई सप्ताह के दूसरे दिन उपस्थित साई भक्तों को संबोधित करते हुए लीला मुजाल्दा ने कहे। श्री सत्यसाई सेवा समिति झाबुआ द्वारा श्री सत्यसाई बाबा के 89वें जन्मोत्सव पर दूसरे दिन भी सायंकाल शरद पंतोजी के निवास सत्यधाम पर सत्यसाई सप्ताह में नाम संकीर्तन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित साईभक्तों नगीन पंवार, राजेन्द्र सोनी, ओम नागर, शुभदा पंतोजी, शिवकुमारी सोनी, गजानन यावले ने सुंदर भजनों की प्रस्तुति दी। महामंगल आरती ओम प्रकाश नागर ने की। 23 नवंबर तक सत्यधाम पर सतत नाम संकीर्तन आयोजित होगें।