स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच रस्साकशी का रहा है। भारत जहाँ इस खींचतान में सदाशय होकर कश्मीर के बड़े भाग को गंवा बैठा है वहीं भारत की सदाशयता से आज पाकिस्तान कश्मीर में अशांति-अलगाव और आतंकवाद का वातावरण बनाए रखनें के अपनें शैतानी मंसुबें में कामयाब होता आया है।
कश्मीर में शांतिपूर्ण चुनाव करानें में मोदी सरकार को झेलनी होगी आधा दर्जन चुनौतियां
हमारें कश्मीर के शैक्षणिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और लोकतांत्रिक अवधारणाओं के विकास प्रयासों को पाकिस्तान जनित आतंकवाद और अलगाववाद नें सदैव नष्ट-भ्रष्ट करनें के दुष्प्रयास किये हैं। पाक ने कश्मीर में अपनें आतंक और अलगाव की तानें बानें को पुख्ता करनें के लिए ज्यादातर जिस बात का सहारा लिया वह है घाटी में हिन्दू विरोध का माहौल बनाना और हिन्दू मुसलमानों में आपसी दरार पैदा करना। हमें यह असफलता स्वीकारनी होगी कि पिछले छ: दशकों के राजनैतिक नेतृत्व की अक्षमता से, पाकिस्तान घाटी के मुसलमानों में हिन्दू विरोधी मानसिकता पैदा करनें के नापाक इरादे में पाक कामयाब रहा। अपनें इन्हीं मंसूबों को पूरा करनें के लिए पाकिस्तान नें घाटी में हो रहे इन चुनावों में हिन्दू मुख्यमंत्री बनानें के विरोध में अभियान चला दिया है।
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| प्रवीण गुगनानी |
दूसरी ओर बीएसएफ की एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकी जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों में गड़बड़ी फैला सकते हैं और हिजबुल मुहाहिद्दीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद दक्षिणी कश्मीर में सुरक्षा बलों, राजनैतिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों पर हमलें कर सकते हैं। कश्मीर में तहरीक-ए-तालिबान के कमांडर मोहम्मद अब्दुल वली अलियास कुरैशी द्वारा 22 आतंकी दस्तों को तैयार करके रखना चुनौती है।
तीसरी चुनौती कि चर्चा करें तो वह यह है कि पिछले माह कश्मीर में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई तब पाकिस्तान तुरंत सक्रिय हो उठा। पाक नें अपनी शैतानी अलगाव वादी योजना पर और तेज काम प्रारम्भ किया और अलग अलग मोर्चों पर भारत विरोधी अभियान को हवा देनी शरू कर दी। पाकिस्तान प्रेरित ये बाह्य आतंकवादी और भारत के ये कथित आंतरिक अलगाववादी कतई नहीं चाहते कि कश्मीर में कभी कोई हिन्दू मुख्यमंत्री शासन संभालें।
चौथी चुनौती हैरतंगेज ढंग से हमारें अंदरूनी हिस्से से ही आई है, और इसी क्रम में कश्मीर की पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के एक नेता ने जम्मू-कश्मीर में हिंदू मुख्यमंत्री बननें की आशाओं को अभिशाप बताकर एक राष्ट्रीयता विरोधी विवाद खड़ा कर दिया है। पीडीपी नेता पीर मंसूर ने घाटी के बाशिंदों से उन राजनैतिक पार्टियों को वोट नहीं देने की अपील की जो सत्ता में आने पर जम्मू-कश्मीर में एक हिंदू मुख्यमंत्री को शासन के लिए बैठा देंगी। पाकिस्तान के कश्मीर में हिन्दू मुख्यमंत्री नहीं बनने देनें के अभियान को भड़काते हुए पीडीपी के विधायक पीर मंसूर अपने अन्धे हिन्दू विरोध को सार्वजनिक रूप से कट्टरता पूर्वक प्रदर्शित करते हुए आपसी सदभाव की सीमाओं को तहस नहस कर दिया। पीडीपी नेता का यह कहना कि हिन्दू मुख्यमंत्री जम्मू-कश्मीर के लिए एक अभिशाप होगा उनके लोकतांत्रिक मूल्यों और भारतीय संविधान में अनास्था और अविश्वास को प्रकट करनें और कहनें वाले के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध कर चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहरानें का समुचित आधार है।
जम्मू-कश्मीर में चल रहे चुनावी अभियान में भाजपा अपनें पुरानें प्रदर्शन से बहुत आगे की बढ़त बनाए हुए है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने कश्मीर के प्रमुख राजनैतिक दलों नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी और कांग्रेस तीनों के सामने अपने प्रदर्शनों और प्रशासनिक सह्रदयता (ख़ास तौर से बाढ़ पीड़ितों को मदद के मामलों में) से एक लम्बी लाइन खींच दी है। इस लम्बी लाइन से वहां राजनैतिक दल ऐसे घबराए गए हैं कि कोई हिन्दू कश्मीर का मुख्यमंत्री न बनने पाए का खतरनाक शेर उन्होंने पिंजरे से बाहर छोड़ दिया है। पाक प्रेरित शक्तियां हिन्दू मुख्यमंत्री को लेकर विधवा प्रलाप करें तो कोई बात नहीं, किन्तु स्वयं भारतीय संविधान से बंधे और उसकी कसमें खाने वाले लोग ही ऐसा करें तो यह तो देशद्रोह ही माना जाना चाहिए। एनसी और कांग्रेस की चुप्पी के बीच बीजेपी ने मंसूर के इस बयान पर सख्त विरोध किया है किन्तु चुनावों के मौसम में ऐसी बातों का जवाब राजनैतिक दल भाजपा को नहीं बल्कि आम जनता और जम्मू-कश्मीरी अवाम के लोगों को देना चाहिए।
पांचवें क्रम पर देखें तो यह कि, कश्मीर के चुनाव को देखते हुए पाकिस्तान नें कश्मीर सीमा के आसपास विशेष तौर से संघर्ष विराम की घटनाओं में तेजी ले आई है। वह संयुक्त राष्ट्र में भारत के विरुद्ध अपीलें करनें की कूटनीति (असफल) के साथ साथ सैन्य क्षेत्रों में भी कार्यवाहियां कर रहा है। पिछले दिनों में पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा के पास के क्षेत्रों में 40 सीमावर्ती चौकियों और आसपास के 25 इलाकों पर मोर्टार से हमले किये।
छठवें भारत की इस चिंता की आग में घी डालनें का काम करते हुए पिछले दिनों चीन ने भारत पाक सीमा पर पाकिस्तानी सैनिकों को सैन्य प्रशिक्षण देना प्रारम्भ कर दिया है। बीएसएफ की खुफिया एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राजौरी सेक्टर के पार भारत सीमा पर बेहद आगे आकर चीन द्वारा पाकिस्तानियों को यह प्रशिक्षण देने का संवेदनशील और भारतीय दृष्टि से खतरनाक काम किया जा रहा है। खुफिया एजेंसी ने यह आशंका प्रकट की है कि ये चीन प्रशिक्षित आतंकी चुनावी दिनों में भारत में प्रवेश करके कुछ दहशत अंगेज घटनाओं को अंजाम दे सकतें हैं।
