इस्लामाबाद। टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए ग्रे लिस्ट में बरकरार रखा है। फिलहाल, ब्लैक लिस्ट में नहीं डालने से पाकिस्तान को आर्थिक रूप से बड़ी राहत मिली। एफएटीएफ ने आतंकियों के खिलाफ सख्त के लिए पाकिस्तान को फरवरी 2020 तक का समय दिया। पेरिस में हुई एफएटीएफ की बैठक में यह फैसला मंगलवार को ही ले लिया गया था, जिसकी आधिकारिक घोषणा शुक्रवार को हुई।
ग्रे लिस्ट में रखे जाने के कारण पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति खराब
मंगलवार को बैठक के लिए पाकिस्तान से आर्थिक मामलों के मंत्री हमाद अजहर के नेतृत्व में चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पहुंचा था। जिन्होंने बैठक में कहा था कि उनके देश ने 27 में से 20 बिंदुओं पर सकारात्मक प्रगति की है। हालांकि एफएटीएफ ने पाकिस्तान की कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त किया।
एफएटीएफ की बैठक में चीन, तुर्की और मलेशिया ने आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई को सराहा था। इन तीनों देशों के समर्थन के बाद एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट में शामिल नहीं करने और बाकी उपायों को लागू करने के लिए ज्यादा समय देने का फैसला किया।
जून 2018 में एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे-लिस्ट में डाला था। उसे 27 सूत्रीय योजना को क्रियान्वित करने के लिए 15 महीने की डेडलाइन दी गई थी, जो सितंबर में समाप्त हो गई। हाल ही में एफएटीएफ से जुड़े एशिया पैसिफिक ग्रुप (एपीजी) ने माना था कि पाकिस्तान ने यूएनएससीआर 1267 के प्रावधानों को उचित तरह से लागू नहीं किया और वो हाफिज सईद समेत दूसरे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रहा है। ऐसे में उस पर ग्रे-लिस्ट से हटाकर ब्लैक लिस्ट में डालने का खतरा मंडरा रहा था।
एफएटीएफ ने पाक को लगातार ग्रे लिस्ट में रखा है। इस कैटेगरी के देश को कर्ज देने में बड़ा जोखिम समझा जाता है। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं ने पाक को आर्थिक मदद और कर्ज देने में कटौती की है। इससे पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हुई।
