नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आधार कानून में किए गए संशोधन पर केंद्र सरकार और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को शुक्रवार को नोटिस जारी किया। इस साल हुए संशोधन के बाद से निजी कंपनियां उपभोक्ताओं की मर्जी से दी गई आधार जानकारी का इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे पहले उपभोक्ताओं के किसी भी आधार विवरण का कंपनियां इस्तेमाल नहीं कर सकती थी। चीफ जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने आधार अध्यादेश के खिलाफ दायर एक अन्य याचिका पर भी साथ-साथ सुनवाई करने पर सहमति दी।
पूर्व सैन्य अधिकारी एसजी वोंबटकेरे और मानवाधिकार कार्यकर्ता बेजवाडा विल्सन ने याचिका दायर कर आधार कानून में संशोधन की संवैधानिकता को चुनौती दी थी। सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में आधार को संवैधानिक माना था, लेकिन निजी कंपनियों को आधार डाटा का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी थी।
संशोधन सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी : याचिकाकर्ता
सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच ने 2018 में कहा था कि निजी कंपनियों को आधार का डाटा दिया जाएगा, तो वे नागरिकों की प्रोफाइलिंग करके निजी जानकारी इकट्ठा करने की कोशिश करेंगी। इसे कोर्ट ने निजता का उल्लंघन माना था। इसी आधार पर याचिकाकर्ताओं ने संशोधन को चुनौती दी। याचिका के मुताबिक, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर आधार कानून में संशोधन किया है।
जून में लोकसभा में पेश किया गया आधार संशोधन विधेयक
केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने इस साल जून में लोकसभा में आधार और अन्य कानून संशोधन विधेयक पेश किया था। विधेयक पारित होने के बाद फिलहाल नया आधार कानून प्रभावी है। इसके तहत उपभोक्ता की मर्जी से सौंपी गई जानकारियां का उपयोग निजी कंपनियां कर सकती है। आम तौर पर कंपनियां आधार डाटा का उपयोग उपभोक्ताओं के बारे में दी गई जानकारी की पुष्टि करने के लिए करती हैं।
