फुनाफुती। प्रशांत महासागर में स्थित एक छोटे से देश तुवालु ने चीन की विस्तारवादी नीति को झटका दिया है। हाल ही में चीन ने तुवालु को उसकी समुद्री सीमा के पास कृत्रिम द्वीप बनाने का प्रस्ताव दिया था। चीन का कहना था कि जलवायु परिवर्तन के चलते प्रशांत महासागर का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में उसके कृत्रिम द्वीप खतरे में पड़े तुवालु के लोगों के लिए मददगार साबित होंगे। हालांकि, 12000 की जनसंख्या वाले तुवालु ने चीन का प्रस्ताव ठुकरा दिया है।
चीन के प्रभाव से निपटने के लिए साथ आएंगे चार देश
तुवालु के विदेश मंत्री साइमन कोफ ने कहा कि उन्हें चीन का प्रस्ताव क्षेत्र में ताइवान का प्रभाव कम करने की कोशिश जैसा लग रहा है। कोफ ने कहा कि ताइवान के समर्थन के लिए हम प्रशांत महासागर में अपने सहयोगी- मार्शल आइलैंड, पलाऊ, नौरू के साथ खड़े हैं। साथ में हम प्रशांत महासागर में चीन के प्रभाव से निपट सकेंगे। हम सहयोग की ताकत में विश्वास रखते हैं।
चीनी कंपनियों ने तुवालु के स्थानीय समुदाय को 40 करोड़ डॉलर (करीब 2870 करोड़ रुपए) में कृत्रिम द्वीप बनाने का प्रस्ताव दिया था। कोफे के मुताबिक, “हम काफी समय से चीन के कर्ज के बारे में सुन रहे थे। चीन हमारे द्वीपों को खरीद कर उनमें सैन्य बेस बनाने के लिए बेताब है। यह चीजें हमें परेशान कर रही थीं।”
ताइवान के साथ संबंध रखने वाले देशों से चीन का रिश्ता नहीं
चीन ने बीते कुछ सालों में प्रशांत महासागर में ताइवान के मुकाबले अपना प्रभाव बढ़ाना शुरू किया है। इसके चलते कुछ छोटे देशों के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो गया है। अब तक सिर्फ 15 देश ही ताइवान को स्वायत्त देश के रूप में मान्यता देते हैं और उसके साथ राजनयिक संबंध रखते हैं। इनमें से ज्यादातर देश प्रशांत महासागर में ही हैं। चीन ताइवान को मान्यता देने वाले किसी भी देश के साथ राजनयिक रिश्ते नहीं रखता।
3 साल में 7 देशों ने छोड़ा ताइवान का साथ
हाल ही में चीन की कोशिशों के चलते दो देशों किरिबती और सोलोमन आइलैंड ने ताइवान से संबंध तोड़कर बीजिंग का साथ दिया है। चीन पर आरोप है कि उसने इन दोनों देशों को आर्थिक मदद और विमानों का लालच देकर अपने साथ कर लिया। चीन ने ताइवान को भी हॉन्गकॉन्ग की तरह ही ‘एक देश, दो सिस्टम’ योजना के तहत मिलाने की कोशिश की। हालांकि, ताइवान लगातार इस योजना का विरोध करता रहा है। 2016 से लेकर अब तक साई इंग-वेन के नेतृत्व में करीब 7 देश ताइवान से राजनयिक रिश्ते खत्म कर चुके हैं।
