Type Here to Get Search Results !

आदिवासी युवाओं को संस्कृति से जोड़े रखकर विकास की तरफ ले जाना चुनौतीपूर्ण


भोपाल।  प्रमुख सचिव आदिम जाति कल्याण श्रीमती दीपाली रस्तोगी ने इंदिरा गाँधी मानव संग्रहालय में आदिवासी भाषा, संस्कृति और विकास पर केन्द्रित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया। श्रीमती रस्तोगी ने कहा कि आज के वैश्विक दौर में आदिवासी युवाओं को संस्कृति से जोड़े रखकर विकास की तरफ ले जाना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हमारे देश और प्रदेश की आदिवासी परम्पराएँ काफी प्राचीन हैं। इनके विकास के लिये लगातार शोध किये जा रहे हैं। आज जरूरी हो गया है कि हम अब तक किये गये शोध के निष्कर्षो को आदिवासी वर्ग के हितों के लिये तैयार की जा रही नीतियों और योजनाओं में शामिल करें।

प्रमुख सचिव ने कहा कि आदिवासी संस्कृति में पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को काफी महत्व दिया गया है। आदिवासी समुदाय में खेती और पशुपालन की अपनी श्रेष्ठ परम्‍पराएँ रही हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में आदिवासी वर्ग की बोलियाँ का संरक्षण इस तरह से किया जाना जरूरी है कि वह सभी समुदाय के बीच लोकप्रिय बनी रहे। प्रमुख सचिव ने उम्मीद जाहिर की कि राष्ट्रीय संगोष्ठी के निष्कर्ष, योजना और नीति तैयार करने में मददगार साबित होंगे।

टाटा इंस्टिट्यूट, मुम्बई के प्रोफेसर श्री विपिन जोजो ने कहा कि देश में 700 आदिवासी समुदाय हैं। इनमें से 46 आदिवासी समुदाय मध्यप्रदेश में है। इनकी संस्कृतियों में काफी विविधता है। आदिवासी भारत समन्वय मंच के संयोजक डॉ. अभय खाखा ने बताया कि संगोष्ठी में 14 राज्यों के 21 जनजाति समुदायों के 200 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में देशभर में 170 आदिवासी भाषाएँ बोली जाती हैं, जिनका संरक्षण बेहद जरूरी है। उन्होंने आदिवासी समुदाय की लोककथाओं, सामाजिक परम्पराओं और चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी दी। संचालक आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजना श्री राकेश सिंह ने राष्ट्रीय संगोष्ठी को प्रदेश के लिये गर्व का विषय बताया।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.