Type Here to Get Search Results !

दुनिया में 96 तरह के कैलेंडर, अकेले भारत में 12 अलग-अलग नया साल मनाने की परंपरा


नई दिल्ली। नया साल ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक शुरू होगा। इसे अंग्रेज अपनी संस्कृति और जीवन का हिस्सा मानते हैं। चूंकि, ब्रिटिश साम्राज्य ने लगभग हर जगह राज किया, इसलिए दुनिया में सबसे ज्यादा मान्यता ग्रेगोरियन कैलेंडर की ही है। लेकिन हर देश और संस्कृति की अपनी एक अलग कालगणना और अपना अलग कैलेंडर है। एक आंकड़े के मुताबिक, दुनियाभर में 96 तरह के कैलेंडर हैं। अकेले भारत में 36 कैलेंडर या पंचांग हैं। इनमें से 12 आज भी चलन में हैं। 24 चलन से बाहर हो चुके हैं। दुनिया में जितने कैलेंडर इस समय चलन में हैं, इनमें से ज्यादातर के नए साल की शुरुआत फरवरी से अप्रैल के बीच होती है।
किरिबाती में सबसे पहले और सबसे आखिर में हॉउलैंड में नया साल शुरू होगा

  • प्रशांत महासागर के किरिबाती द्वीप और समोआ द्वीप के समोआ राज्य में सबसे पहले न्यू ईयर मनेगा। इन जगहों पर 31 दिसंबर को भारतीय समयानुसार दोपहर 3:30 बजे नया साल मना लिया जाएगा। इसके बाद न्यूजीलैंड के चाथम द्वीपसमूह में न्यू ईयर मनेगा। इस समय भारत में 31 दिसंबर को दोपहर 3:45 बज रहे होंगे।
  • इसी क्रम में चीन, जापान और सिंगापुर सहित 14 देश भारत से पहले न्यू ईयर मना चुके होंगे। भारत 15वें नंबर पर रहेगा। फिर आधे घंटे बाद पाकिस्तान में नया साल मनाया जाएगा। सबसे आखिरी में प्रशांत महासागर में भूमध्य रेखा के उत्तर में स्थित हॉउलैंड नाम के एक आइलैंड और हवाई और ऑस्ट्रेलिया के बीच स्थित बेकर आइलैंड में नया साल शुरू होगा, तब भारत में 1 जनवरी को शाम के 05:30 बज चुके होंगे।
  • चीनी नववर्ष जनवरी-फरवरी के बीच शुरू होता है
  • ज्यादातर कैलेंडर धर्म और संस्कृति के आधार पर हैं। कुछ कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होते हैं। कुछ सौर चक्र पर। जैसे- चीनी कैलेंडर लुनिसोलर। दुनियाभर में कैलेंडरों के अलग-अलग आधार होने के कारण ग्रेगोरियन कैलेंडर में नया साल अलग-अलग समय मनाया जाता है। कुछ देशों में तो नया साल कई दिनों तक होता है। उदाहरण के तौर पर इथियोपियाई नववर्ष हर साल 11 सितंबर को पड़ता है। चीनी नववर्ष 21 जनवरी और 20 फरवरी के बीच कभी भी हो सकता है। आज भी दुनिया कैलेंडर प्रणाली पर एकमत नहीं है। दुनिया में सर्वाधिक प्रचलित ग्रेगोरियन कैलेंडर है। इसे पोप ग्रेगरी-13 ने 24 फरवरी 1582 को लागू किया था। यह कैलेंडर 15 अक्टूबर 1582 में शुरू हुआ।

भारत के ये 24 संवत अब चलन में नहीं
स्वयंभू मनु संवत्सर, सप्तऋषि संवत, गुप्त संवत, युधिष्ठिर संवत, कृष्ण संवत, ध्रुव संवत, क्रोंच संवत, कश्यप संवत, कार्तिकेय संवत, वैवस्वत मनु संवत, वैवस्वत यम संवत, इक्क्षवाकु संवत, परशुराम संवत, जयाभ्युद संवत, लौकिकध्रुव संवत, भटाब्ध संवत (आर्य भट्ट), जैन युधिष्ठिर शकसंवत, शिशुनाग संवत, नंद शक, क्षुद्रक संवत, चाहमान शक, श्रीहर्ष शक, शालिवाहन शक, कल्चुरी या चेदी शक, वल्भिभंग संवत।
भारत में पंचांग का इतिहास

  • देश में सर्वाधिक प्रचलित संवत विक्रम और शक संवत है। इसके प्रणेता मालवा के सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य माने जाते हैं। उन्होंने समस्त प्रजा का ऋण चुकाकर यह संवत् शुरू किया था। माना जाता है कि विक्रम संवत गुप्त सम्राट विक्रमादित्य ने उज्जयनी में शकों को पराजित करने की याद में शुरू किया था। यह संवत 57 ईसा पूर्व शुरू हुआ था। इसे मालव संवत् भी कहा जाता है। इसमें कालगणना सूर्य और चंद्र के आधार पर की जाती है। यह चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा से चैत्र नवरात्र के साथ प्रारंभ होता है।
  • इसी समय चैत्र नवरात्र प्रारंभ होता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन उत्तर भारत के अलावा गुड़ी पड़वा और उगादी के रूप में भारत के विभिन्न हिस्सों में नव वर्ष मनाया जाता है। सिंधी लोग इसी दिन चेटीचंड के रूप में नववर्ष मनाते हैं। शक संवत को शालीवाहन शक संवत के रूप में भी जाना जाता है। माना जाता है कि इसे शक सम्राट कनिष्क ने 78 ई में शुरू किया था। स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने इसी शक संवत में मामूली फेरबदल करते हुए इसे राष्ट्रीय संवत के रूप में अपना लिया। राष्ट्रीय संवत का नव वर्ष 22 मार्च को होता है, जबकि लीप ईयर में यह 21 मार्च होता है।

शक संवत
यह 78 ई में शुरू हुआ था। चैत्र 1,1879 यानी 22 मार्च 1957 को इसे भारत के राष्ट्रीय कैलेंडर के रूप में अपनाया गया। सबसे प्रचलित मतानुसार इसे कुषाण राजा कनिष्क ने चलाया था। इसका प्रथम माह चैत्र और अंतिम महीना फाल्गुन है। इसका सबसे प्राचीन शिलालेख चालुक्य वल्लभेश्वर का है। इसकी तिथि 465 शक संवत है।

Tags

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.