एंटीबायोटिक्स की एक क्लास 'एमिनोग्लाइकोसाइड्स' के माध्यम से शुरुआती डिमेंशिया (पागलपन) का अच्छा उपचार हो सकता है। शोधकर्ताओं ने एक शोध में इस बात का पता लगाया है।
फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया, शुरुआती डिमेंशिया का सबसे आम प्रकार है, जो आमतौर पर 4० और 65 की उम्र के बीच शुरू होता है। यह मस्तिष्क के फ्रंटोल और टेंपोरल लोब को प्रभावित करता है, जिससे व्यवहार में बदलाव, बोलने और लिखने में कठिनाई और स्मृति में गिरावट होती है।
ह्यूमन मॉलिक्यूलर जेनेटिक्स में छपे एक शोध के अनुसार, फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया के रोगियों के एक सबग्रुप में एक विशिष्ट जेनेटिक म्यूटेशन होता है। यह मस्तिष्क की कोशिकाओं को प्रोग्रानुलिन नामक प्रोटीन बनाने से रोकता है।
हालांकि, प्रोग्रानुलिन को व्यापक रूप से नहीं समझा जा सका है, लेकिन इसकी अनुपस्थिति सीधे तौर पर बीमारी से जुड़ी हुई है।
अमेरिका स्थित केंटकी विश्वविद्यालय के शोधकतार्ओं ने पाया कि इस म्यूटेशन के साथ न्यूरोनल कोशिकाओं में अमीनोग्लाइकोसाइड एंटीबायोटिक्स के जुड़ने के बाद कोशिकाओं ने म्यूटेशन को छोड़ दिया और फुल लेंथ के प्रोग्रानुलिन प्रोटीन बनाना शुरू कर दिया।
