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कोरोना काल में मध्यप्रदेश कहीं‘‘ शिवराज‘‘ के बजाय ‘‘शवराज‘‘ न हो जावे

आजाद सिंह डबास भोपाल। जैसा कि सर्व विदित है कि मध्यप्रदेष में आजकल कोरोना का संक्रमण लगातार फैलता जा रहा है। प्रदेष भर में फैली इस महामारी का सबसे चिन्ताजनक पहलू यह है कि इस बीमारी से होने वाली मृत्यु दर देष में सबसे अधिक मध्यप्रदेष में है। इसके अनेक कारण हैं। विगत 15 वर्षों के भाजपा शासनकाल में प्रदेष की चिकित्सा व्यवस्था में कोई सुधार नहीं किया जाना सबसे महत्वपूर्ण कारण है। इन 15 वर्षों में लगातार 13 वर्ष तक प्रदेष के मुख्यमंत्री रहने के फलस्वरुप इन शर्मनाक हालातांे के लिये कोई ओर नहीं अपितु षिवराज ही सर्वाधिक दोषी हैं। चाहे प्रदेष के शहरी क्षेत्र हों अथवा ग्रामीण, चहुँऔर र्दुदषा ही र्दुदषा का आलम है।

कोरोना महामारी की रोकथाम में षिवराज सरकार हर प्रकार से फेल है। अन्य अव्यवस्थाओं को एक तरफ रखते हुए लाॅकडाउन 3.0 के अंर्तगत प्रारंभ की गई शराब दुकाने ही कोरोना की महमारी को फैलाने के लिए पर्याप्त हैं। लाॅकडाउन के दौरान दी गई छूट के पहले ही दिन से आमजन की भारी भीड़ उमड़ने के समाचार मय फोटोग्राफ्स के प्रदेष से प्रकाषित सभी समाचार पत्रों में देखने को मिल रहे हैं। टीवी चैनलों द्वारा भी इन समाचारों को प्रमुखता से दिखाया जा रहा है। इन समाचारों को देखने/पढ़ने उपरान्त लाॅकडाउन का कोई औचित्य ही नहीं रह जाता है। अगर प्रदेष में शराब की दुकानों पर इसी तरह शराब बिकती रही तो कोरोना का दुगनी-चैगुनी गति से फैलना निष्चित है।

अगर कोरोना की महामारी को रोकने के लिए षिवराज एवं उनकी सरकार कोई कारगर चिकित्सिय व्यवस्था करने में असर्मथ हैं तो कम से कम शराब की दुकाने तो मात्र एक आदेष से बंद कर कोरोना को फैलने से रोकसकते हैं। अन्य राज्य सरकारों की तरह षिवराज सरकार द्वारा भी राजस्व की कमी का रोना-रोना एक अत्यंत ही लचर बचाव है। प्रदेष में शराब से होने वाली आय मात्र 8 से 10 हजार करोड़ है। यह एक त्रास्दी ही है कि बैकडोर से बनी भाजपा सरकार एक तरफ जहाँ गरीबों को राहत देने के लिये ‘‘संबल‘‘ जैसी जन-कल्याण योजना को पुनः प्रारंभ करती है, वहीं दूसरी ओर इससे प्राप्त होने वाली ज्यादातर राषि को शराब की भेंट चढने के रास्ते खोल देती है जिससे गरीब वहीं का वहीं बना रहने के लिये अभिषप्त है।

आजकल अक्सर समाचारों में यह पढ़ने में आता है कि कोरोना की महामारी से दुनिया में बड़े बदलाव देखने में मिल रहे हैं। कोरोना से दुनिया बदल रही है और भविष्य में और अधिक बदलेगी। विगत 3 माह से दुनिया भर में चल रहे लाॅकडाउन से पर्यावरण में उल्लेखनीय सुधार देखने में आ रहा है। भारत जैसे गरीब देष में ऐसा ही एक सुधार विगत 40 दिनों के लाॅकडाउन में देखने को मिला है। यह है शराब की खपत में उल्लेखनीय कमी। शराब के अतिरिक्त बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, गुटका इत्यादी जहरीले पदार्थों की खपत में भी भारी कमी आई है। मैंने आजतक बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू एवं गुटका इत्यादी का तो कभी सेवन नहीं किया लेकिन अत्यंत सीमित मात्रा में शराब जरुर ली है। लाॅकडाउन के समय मेरे पास लगभग आधी बोटल शराब उपलब्ध थी जो 10 दिन बाद समाप्त हो गई। विगत 30 दिन से मैने शराब का सेवन नहीं किया है ओर ना ही मुझे इसकी आवष्यक्ता महसूस हो रही है। जब मैं शराब के बगैर रह सकता हूँ तो अन्य लोग क्यों नहीं रह सकते? हाँ, यह अवष्य है कि ज्यादातर लोगों के लिये शासकीय प्रतिबंध ही इसका एकमात्र उपाय है। इसलिये शराबबंदी अपेक्षित ही नहीं अपितु अनिवार्य है। ऐसा होने से न सिर्फ कोरोना की रोकथाम में मदद मिलेगी अपितु आम जन के स्वास्थ्य एवं उनकी माली हालात में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।

शराब के अतिरिक्त कोरोना काल के दौरान बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू एवं गुटका इत्यादी की खपत में भी उल्लेखनीय कमी आई है। यह अच्छा मौका है जब इन जहरीले उत्पादों पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जावे। ये सारे उत्पाद कहीं न कहीं शरीर में केंसर जैसे भयंकर रोग पैदा करते हैं। इन उत्पादांे पर प्रतिबंध लगने से गरीबों के स्वास्थ्य में बड़ा सुधार होगा और अनेक गरीब लोग अकाल मौत के मुहं में जाने से बचेंगे।प्रदेष के वन विभाग का मध्यप्रदेष राज्य लघु वनोपज संघ नामक उपक्रम हर साल तेंदू पत्ता का संग्रहण करता है। तेंदू पत्ता का एक मात्र उपयोग बीड़ी बनाने में होता है जो प्रदेष में केंसर का एक बड़ा कारण है लेकिनरोजगार देने के बहाने हर वर्ष इसका संग्रहण किया जाता है। तंेदू पत्ता संग्रहण पर रोक लगाने हेतु गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। तेंदू पत्ता के बजाय अगर अन्य लघु वनोपजों पर ध्यान दिया जाता है तो एक तरफ इससे कहीं ज्यादा रोजगार मिलेगा वहीं दूसरी ओर शासन को हजारों करोड़ का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है।

जहाँ तक प्रदेष के राजस्व का मसला है तो इसे बढाने हेतु शराब बिक्री के अलावा अन्य कई कारगर उपाय किये जा सकते हैं। भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल डालकर हजारों करोड़ की शासकीय धन राषि की लूट को बचाया जा सकता है। हनीट्रेप घोटाला, ई-टेन्डरिंग घोटाला, व्यापम घोटाला, पेन्षन घोटाला, वृक्षारोपण घोटाला, रेत घोटाला, पोषण आहार घोटाला जैसे भ्रष्टाचार के अनेक गंभीर मामलों की त्वरित एवं निष्पक्ष जांच से ही अनेक भ्रष्ट वरिष्ठ प्रषासनिक अधिकारियों के नाम सामने आ सकते हैं, जिनकी संपति को कुर्क कर हजारों करोड़ की आय सरकार को हो सकती है। प्राकृतिक संसाधनों की लूट को रोक कर हजारों करोड़ का राजस्व बढ़ाया जा सकता है। सरकार में किये जा रहे अनावष्यक खर्चों एवं फिजूल की योजनाओं को बंद कर सैंकड़ो करोड़ की बचत की जा सकती है। ऐसे और अनेक उपाय सरकार कर सकती है।

मेरा सुझाव है कि प्रदेष में शराबबंदी मात्र कोरोना काल के लिये ही नहीं अपितु हमेषा के लिये की जाना चाहिए। षिवराज को चाहिए कि वे प्रदेष में तत्काल शराबबंदी लागू कर संपूर्ण भारतवर्ष में शराबबंदी लागू कराने हेतु माननीय प्रधानमंत्री जी से अनुरोध करें ताकि इस महामारी के दौरान महात्मा गांधी की भी इच्छापूर्ति हो सके। देष में शराबबंदी का इससे अच्छा मौका नहीं हो सकता है। शराबबंदी करने से ही मध्यप्रदेष को ‘‘शवराज‘‘ बनने से बचाया जा सकता है।