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लाॅक डाउन का असर:किचिन का बजट गड़बड़ाया

  • उड़द 60 से 95 और मूंग दाल 65 से 100 रूपए 

बेगमगंज। लाॅक डाउन के कारण सामग्री की कमी होने का असर अब बाजार में दिखने लगा है। जहां उड़द व मूंग दाल के भाव बढ़े है। वहीं सब्जियों के दम कम है। इससे किचिन का बजट तो गडबड़ाया है लेकिन इन दिनों सब्जी का अधिक सेवन किया जा रहा है। 
किराना व्यापारियों के मुताबिक तीन माह पहले तक उड़द की दाल 60 से 65 रूपए तक बिक रही थी। जिसके दाम अब 95 से 100 रूपए किलो पर पहुंच गए है। मंडी मंे नीलामी बंद होने के कारण दामों में बढ़ोत्तरी हुई है। अभी दाम और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। महिलाआंे का कहना है कि दाल, तेल, मिर्च बेसन आदि के दाम बढ़ने से अब ये दालें ं गरीबों की थाली से दूर होती जा रहीं है। 

खुदरा बाजार में तुवर दाल भी 90 रूपए के पार जा चुकी है। इससे रसोई बजट गड़बड़ाने लगा है। किराना व्यापारी हाजी नफीस नवाब, शिखरचंद जैन का कहना है कि लाॅक डाउन के कारण मंडीयां बंद है जिससे थोक किराना व्यापारियों के यहां उक्त सामग्री नहीं आ पाने के कारण स्टाक की कमी है जिससे जिन्सांे के दाम बढ़ रहे है।   इसका असर स्थानीय बाजार पर भी पड़ रहा है। मौजूदा वक्त में दालों के भाव में करीब 30  से 40 प्रतिशत वृद्धि हुई है। 

सब्जी विक्रेता, इस्हाक राईन, भागीरथ कुशवाहा का कहना है कि लाॅक डाउन के चलते सब्जी तो बाहर से आ रही है लेकिन प्रदेश के बाहर नहीं जा पाने के कारण अभी सब्जी के दाम कम है। लेकिन जैसे जैसे मार्केट खुलते जा रहे है वैसे ही खपत बढ़ रही है जिससे अब दाम बढ़ने लगे है जिसका असर स्थानीय बाजार पर भी पड़ेगा।  

गड़बड़ाया रसोई का बजटः-गौरी मिश्रा व रेहाना नवाब का कहना है कि दालों के रेट मंे तेजी आने से रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। सबसे ज्यादा तेजी उड़द व मूंग,राहर  की दालों के व अन्य मिर्च मसाला तेल आदि के रेट में हुई है। लाॅक डाउन का असर रसोई में दिखने लगा है। जिसका असर गरीबो पर अधिक हो रहा हे। 

उपकार पापड़ केन्द्र के संचालक संजय कुमार नेमा का कहना है। कि जो उड़द की दाल गत वर्ष 60 रूपए प्रति किलो के हिसाब से बाजार में बिक रहीं थी इस साल उसके रेट 100 रूपए प्रति किलो के हिसाब से हैं ऐसे में पापड़ बनवाने वाले ग्राहकों भी लाॅक डाउन के चलते नहीं आ रहे है। 

किसान सुरेन्द्र कुशवाहा, रफीक मंसूरी का कहना है कि लाॅक डाउन के कारण मंडी मंे खरीदी बंद होने से किसान ओने पोने दामों में अपनी उपज व्यापारियों को मंडी के बाहर बेंच रहीं है। बावजूद उसके जरूरत के हिसाब से किसान विक्रय कर रहा है। शेष उपज रोककर रखने से मार्केट मंे दाम बढ़ रहे है। सबसे अधिक असर उड़द , मूंग राहर की दाल पर हुआ है। किसानों को उपज का सही दाम नहीं मिलने से कम ही दालंे बाजार में बिकने आ रही ंहै। यहीं कारण है कि किचन का बजट गडबड़ा रहा है।