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खेतों में गहरी जुताई किसानांे के लिए वरदानः जेपी तिवारी

बेगमगंज। खेतों की गहरी जुताई किसानांे के लिए वरदान है। बारिश पूर्व  मिट्टी पलटने वाले हल जैसे मोल्ड बोर्ड प्लाऊ, टर्न रेस्ट प्लाऊ, या रिवर्स विल मोल्ड प्लाऊ के द्वारा तीन वर्ष मंे कम से कम एक बार जुताई जरूर करना चाहिए ,क्योंकि लगातार फसले उगाने से मृदा सख्त एवं कठोर हो जाने से जल धारण क्षमता एव ंभूमि की उर्वरा शक्ति कम होती जाती है। और फसलों मंे विभिन्न प्रकार के रोग, कीट एवं बीमारियां एवं खरपतवारों की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जाती है। जिससे फसलांेत्पादन मे ंकमी एवं लगातार जल स्तर मंे गिरावट देखी जा रही है। इन सभी समस्याआंे से निजात पााने के लिए आवश्यक है कि अपने खेतांे में ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई की जाए।

उक्त उदगार लाॅक डाउन के चलते सोशल डिस्टेंश का पालन करते हुए  किसानांे के को जागृत करने  कृषि एसडीओ जेपी तिवारी ने विभिन्न ग्रामों का दौर करते हुए व्यक्त किए ।  उन्हेाने किसानों को  बताया कि  खेतों में गहरी जुताई करने से भूमि की ऊपरी कठोर परत टूट जातीहै। जिससे मृदा में वर्षा जल धीरे धीरे रिस रिस कर जमीन के अंदर चला जाता है बारिश के जल का रूकाव जमीन में अत्याधिक होने के कारण मृदा में जल भरण क्षमता एवं जल स्तर मंे वृद्धि होती है। मृदा की भौतिक संरचना मंे सुधार होता है। मृदा में हवा का आवगमवन बढ़ जाता है। एवं सूक्ष्म जीवांे की संख्या मंे भी वृद्धि हो जाती है। जैविक पदार्थो का विघटन सर्वाधिक होता है, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ जती है। जिससे वायुमंडल की नाइट्रोजन जल में घुलकर मृदा मंे चली जाती है। मृदा की उर्वरा शक्ति मंे वृद्धि होती है। जमीन के अंदर छिपे कीटों के अंडे प्यूपा आदि जमीन के ऊपर आ जाते है और तेज धूप के कारण मर जाते है।

उन्हेाने कहा कि खरपतवारों के बीज एवं रोग फैलाने वाले कवक, बैक्टीरिया एवं वायरस भी तेज धूप के कारण मर जाते है जिससे अगली फसल मंे रोग कीट एवं खरपतवारांे की समस्या कम हो जाती है। ग्रीष्म कालीन जुताई खेत के ंढाल की विपरीत दिशा मंे करने से मृदा एवं जल कटाव में कमी एवं वर्षा जल बहकर नुकसान हो जाने से भी बच जाता है। ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई करने से फसल उत्पादन मंे वृद्धि हो जाती है। उन्होने किसानों से समय रहते गहरी जुताई करने की सीख दी।