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आवारा सांड ने महिला को फेंका, लोगो ने बचाया, आवारा मवेशी बन रहे हादसांे की वजह मौतों के बावजूद नहीं हो रही व्यवस्था


बेगमगंज। यूपी सरकार की तर्ज पर मप्र सरकार ने भी गऊशालाएं खोलकर आवारा मवेशियांे को उसमें रखने का फरमान तो जारी कर दिया था। लेकिन गऊ शाला खोलने के लिए नगरीय निकायांे को भूमि उपलब्ध नहीं कराई जाने से समस्या जस की तश बनी रही और अब सत्ता परिवर्तन होने तथा लाॅक डाउन के बाद इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया गया। यही वजह है कि बुधवार को फिर एक आवारा सांड ने सब्जी खरीद रही एक महिला को घायल कर दिया यह तो अच्छा हुआ कि लोगो ने उक्त महिला को खींच लिया जिससे उसे अधिक चोटे नहीं आ पाई।

लाॅक डाउन के कारण सब्जी बाजार के स्थान पर मोहल्लों मंे ही सब्जी विक्रय के फरमान के चलते सब्जी विक्रेता हाथ ठेलों मंे सब्जी रखकर बेंच रहे है जिनसे  लखेरा पुरा मंे सब्जी लेने के लिए 40 वर्षीय महिला दया बाई ठेले पर पहुंची तभी  मौजूद एक आवारा सांड ने उक्त महिला को अपने सींगो से उठाकर फेंक दिया जिससे महिला दूर जा गिरी सांड इस पर भी नहीं रूका उक्त महिला को मारने के लिए लपका तो व्यापारियों ने लाठियांे से उसे रोकने का प्रयास किया और विफल होता देख एक दुकानदार ने उक्त महिला को खींच कर दुकान के उस पार कर दिया जिससे महिला की जान बच गई।

सांड के हमले से महिला दूर जा गिरी जिससे उसके सिर हाथ पैर पसलियांे मंे चोटे आई है। इससे पूर्व भी उक्त सांड कई लोगो को घायल कर चुका है उसकी  दादा गिरी इतनी अधिक है कि दुकानदारांे के द्वारा लाठियांे से भगाने या उस पर पानी डालने का असर नहीं होता। कई बार सब्जी विक्रेता उक्त सांड व आवारा मवेशियांे से हो रहे नुकसान को लेकर अधिकारियों सहित जन सुनवाई मंे आवेदन दे चुके है। लेकिन किसी तरह की व्यवस्था नहीं होने के कारण आज तक ऐसे मवेशियांे के खिलाफ अभियान चलाकर कोई व्यवस्था नहीं की जा सकी है।

हां यह जरूर हुआ है कि वाहनांे की टक्कर से रात के अंधेरे में ये आवारा मवेशी मारे न जाए तो उनके सीगों पर या गले में रडियम पट्टा डालने के लिए पुलिस , राजस्व प्रशासन, एवं नपा प्रशासन आगे आ चुका है और कई बार ऐसे मवेशियांे को रेडियम पट्टे पहनाए जा चुके है समाज सेवी लोग भी इसमंे भागीदारी कर चुके है। जब ऐसे आवारा मवेशी किसी वाहन से टकरा जाते है तो हंगामा करने के लिए लोग आगे आ जाते है ओर उक्त मवेशी का स्वयं का निजी बता कर पैसे वसूलना या फिर उक्त वाहन चालक के खिलाफ पुलिस मंे रिपोर्ट कर प्रकरण बनवाने में देर नहीं करते। लेकिन जब वही जानवर किसी हादसे का सवब बनते है तो फिर ऐसे लोग नजर नहीं आते।
नियम कार्रवाई का लेकिन नहीं की कार्रवाई
ऐसे आवारा मवेशी जिन्हंे किसान स्वंय आवारा छोड़े हुए है उनके खिलाफ कार्रवाई का नियम है लेकिन आज तक ऐसे किसी भी पशुपालक के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई नहीं की है। मवेशी की रिपोर्ट पर जरूर वाहन चालकांे के विरूद्ध कार्रवाई की जाती है।

आखिर कब तक होते रहेगें हादसेः- यदि आकड़ांे पर नजर डाली जाए तो कई दुर्घटनाएं मवेशियांे के कारण क्षेत्र मंे घट चुकी है कुछ लोग अपनी जान गवां चुके है। कब गऊ शालाएं खुलेगी और कब समस्या का निदान होगा यह सवाल आम आदमी की जुबान पर है कि जब तक क्या दुर्घटनाएं होती रहेगी लोग अपनों को खाते रहेगें। जब तक गाय दूध देती है लोग उसकी देखभाल करते है उसके बाद उसे सड़कांे पर छोड़ देते है। इससे भी बुरा हाल उन बैल बछड़ों और साडों का है जो अब हर सड़क चैराहांे और गलिांे में लोगों के लिए आफत बनकर घूम रहें है।

सुझावः- ऐसे आवारा मवेशियांे के बारे मंे प्रशासन को एनाउंस कराकर चेतावनी देना होगी कि यदि वे पालतू है तो बांधकर रखें अन्यथा ऐसे मवेशियांे को पशु पालकों को निःशुल्क प्रदान कर दिया जाएगा। यदि प्रशासनिक अधिकारी ऐसा करते है तो मवेशियांे का भटकना भी बंद हो जाएगा और हादसांे मंे विराम लगेगा।

नपाधिकारी बीएल सिंह का कहना है कि ऐसे मवेशियांे को कांजी हाऊस में बंद करने के बाद न तो उन्हें कोई छुड़ाने आता है और न नीलामी में कोई खरीदता है। गऊशाला मंे जगह नही ंहोने से वे लेते नहीं है। नई गऊ शाला के लिए शासन से जमीन मांगी है भूमि का आवंटन होते ही नवीन गऊ शाला का निर्माण कराकर ऐसे आवारा मवेशियांे को उसमें रखा जाएगा ।