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रायसेन जिले के सिलवानी जनपद में ओडीएफ की जमीनी हकीकत: बंद पडे हैं 30 ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक स्वच्छता परिसर

  • पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के साथ ही ग्राम पंचायतों ने भी उच्चस्तर पर समस्या के बारे में अवगत नहीं कराया, जिम्मेदार अफसरों ने भी एक करोड़ रुपए ज्यादा की लागत से बने स्वच्छता परिसरों को कभी क्रास चेक नहीं किया

सिलवानी।
एक ओर गांव-गांव ओडीएफ घोषित हो चुके है और यह माना जा रहा है कि ओडीएफ गांवों में अब खुले में कोई शौच के लिए नहीं जाता। हालांकि इसके ठीक उलट रायसेन जिले के सिलवानी जनपद के 30 ग्रामों में बने सामुदायिक स्वच्छता परिसर बनने के बाद से ही बंद पडे हैं। हद तो यह कि इन स्वच्छता परिसरों को चालू करवाने के बजाय 39 और नए सामुदायिक स्वच्छता परिसरों का निर्माण हो रहा है। दूसरी ओर, खुले में ग्रामीण शौच के लिए जा रहे हैं।



इस बारे में मिली जानकारी के अनुसार शासन ने सिलवानी तहसील में पहले चरण में 30 सामुदायिक स्वच्छता परिसर स्वीकृत किए थे। इनमें से अधिकांश बनकर तैयार हो चुके हैं, तो कुछ अब भी अधूरे हैं। प्रत्येक स्वच्छता परिसरों के निर्माण पर 3.44 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। इस हिसाब से 1 करोड़ 3 लाख 20 हजार रुपए इन शौचालयों को बनाने में खर्च कर दिए, लेकिन बिजली, पानी, सफाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण यह शोपीस बनकर खड़े हुए हैं, जिससे इनके निर्माण पर खर्च की गई राशि बर्बाद होती दिख रही है।


दूसरे चरण में बनाए जा रहे हैं 39 स्वच्छता परिसर

शासन ने दूसरे चरण में 39 स्वच्छता परिसर बना रहा है। इस बार इनकी लागत बढ़ाकर 4 लाख 60 हजार रुपए कर दी है। इनमें से भी कुछ परिसर बनकर तैयार हो चुके हैं, शेष पंचायतों में भी काम चल रहा हैं। इन 39 स्वच्छता परिसर पर शासन 1 करोड़ 79 लाख रुपए खर्च किए हैं। इसको लेकर ग्रामीणों ने सवाल खडेÞ किए हैं।


पहले चरण में नाकामी तो दूसरे चरण में क्यो हो रहा काम

ऐसे में नागरिकों ने सवाल उठाया है कि जब पहले चरण में शासन की योजना सार्थक नहीं हो सकी तो फिर दूसरे चरण में ऐसे स्वच्छता परिसर बनाकर करोड़ों रुपए क्यों बर्बाद किए जा रहे हैं। एक ओर इन स्वच्छता परिसरों के संचालन के लिए शासन ने ठोस नीति नहीं बनाई तो दूसरी ओर पंचायतों के पास भी संचालन को लेकर कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में यह नवनिर्मित स्वच्छता परिसर के खंडहर हो रहे हैं।


खुले में शौच से मुक्ति की योजना के बचे हैं खंडहर

उल्लेखनीय है कि गांवों को खुले में शौच मुक्त करने के लिए शासन यह योजना लाई थी, जिसमें ऐसे स्थान पर इन्हें बनाना था जहां सर्वाधिक भीड़ भाड़ रहती हो। ग्रामीणों के साथ साथ बड़े आयोजनों में इनकी उपयोगिता साबित हो सके। इसके अलावा बिजली पानी की पर्याप्त व्यवस्था हो। बावजूद इन सबको दरकिनार कर स्वच्छता परिसर बना दिए गए। अब पंचायतें इनका संचालन नहीं कर रही हैं। नतीजे में स्वच्छता मिशन के तहत घोषित ओडीएफ पंचायतों में रहने वाले लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। वजह यह है कि इन पंचायतों में लाखों रुपए की लागत बनवाए गए स्वच्छता परिसर में ताला लगा है।


पानी ही नही तो गांववाले क्यों जाएं स्वच्छता परिसरों में

इस संबंध में सरपंच-सचिव का कहना है कि पानी की व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीण शौचालयों का उपयोग नहीं कर रहे हैं। और पंचायत के पास अलग से बजट का कोई प्रावधान नहीं है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायतों में न केवल स्वच्छता परिसर बनवाए गए हैं, बल्कि हर घर में शौचालय निर्माण कराने का दावा किया जा रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश गांव में पानी का इंतजाम नहीं होने से इन शौचालयों का उपयोग ही नहीं हो रहा है और ग्रामीण अभी भी खुले में शौच जा रहे हैं।




ओडीएफ घोषित पंचायतों में ही स्वच्छता परिसर हैं तालाबंद

खास बात यह है कि विकास खंड सिलवानी  की अधिकांश पंचायत ओडीएफ घोषित हो चुकी हैं। बावजूद ओडीएफ के मानकों में इनमें से एक भी पंचायत खरी नहीं उत्तरती, क्योंकि इन गांव में रहने वाले अधिकांश ग्रामीणों को सुबह व शाम के समय खुले में शौच जाते देखा जा सकता है।


बंद पडे स्वच्छता परिसरों को जल्द चालू करवाया जाएगा

सिलवानी जनपद के तहत जिन भी ग्राम पंचायतो के स्वच्छता परिसर बन्द हैं, उनको पंचायत से बात कर कर शीघ्र ही चालू कराया जाएगा। साथ ही परिसर बंद रखने के बारे में भी बात की जाएगी, ताकि आगे से ऐसा नही हो।

-नीलम रैकवार, जनपद सीईओ, सिलवानी

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