- मार्क्सवादी कम्युनिष्ट पार्टी ने दो टूक कहा-चार साल तब मध्यप्रदेश के सभी नागरिकों की पूरी कमाई के बाद भी नहीं उतरेगा कर्ज
- प्रदेश पर कुल कर्ज 5.56 लाख करोड़ पार, जिस पर 12 प्रतिशत की दर से हर साल 66,720 करोड़ रुपए तो ब्याज ही देना पड़ेगा
भोपाल। चार्वाक ने कहा था कि अगर स्वर्ग में भुगतान के लिए यदि उधार लेकर भी घी खाना पड़े तो खाना चाहिए। मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार ने तो इस जन्म में ही उधार लेकर घी पीना शुरू कर दिया है, क्योंकि उसे मालूम है कि इस कर्ज को चुकाने के लिए तो प्रदेश की जनता को ही टैक्स के कोल्हू में पीस कर तेल निकाला जाने वाला है।

मध्यप्रदेश पर कुल कर्ज 5.56 लाख करोड़ पार कर गया
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा है कि जब प्रदेश की भाजपा की मोहन यादव सरकार विकास के ऊंचे दावे कर रही है, तब हकीकत यह है कि वर्ष 2025-26 के वित्त वर्ष में प्रदेश सरकार ने हर रोज 250 करोड़ रुपए कर्ज लेकर सरकारी ढांचे को चलाया है। इस वित्त वर्ष में सरकार ने 91500 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है।
माकपा ने कहा है कि स्थिति यह है कि प्रदेश पर कुल कर्ज 5.56 लाख करोड़ को पार कर गया है। प्रदेश की कुल जनसंख्या 9 करोड़ के आसपास है, जिसका अर्थ यह है कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक 6.17 लाख का कर्जदार है दूसरी ओर अभी विधानसभा में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार प्रदेश में प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 1.69 लाख रुपये है। इसका अर्थ यह है कि यदि प्रदेश के सारे नागरिकों की सारी आय भी कर्ज चुकाने के लिए दी जाए तो भी इसे चुकाने में चार साल लगेंगे।
भारी ब्याज के कारण चार साल बाद भी कर्जमुक्त नही हो सकेंगे
प्रश्न यह कि क्या ऐसा करने पर प्रदेश कर्ज मुक्त हो जाएगा? ऐसा इसलिए नहीं हो पाएगा, क्योंकि वर्तमान कर्ज पर 12 प्रतिशत की ब्याज दर से हर साल 66,720 करोड़ रुपए तो ब्याज ही देना पड़ेगा। दूसरी बात यह है कि क्या राज्य सरकार नया कर्ज लेना बंद कर देगी? वह तो अप्रैल महीने में ही फिर कर्ज लेने का प्रस्ताव तैयार कर रही है।
यह कर्ज भाजपा सरकार प्रदेश की जनता के कल्याण के लिए ले रही है? तो फिर प्रदेश में विकास कहां है? किसानों को मंडियों में उनकी खून पसीने की मेहनत की कमाई की कीमत नहीं मिल रही है। मजदूरों कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन नहीं मिल रहा है। आशा उषा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने मानदेय वृद्धि के लिए लड़ रही हैं।
कर्ज से बन रहे पुल और बिल्डिंगें उद्घाटन के साथ ही टूट रहे
कर्ज के इस पैसे से जो बिल्डिंग बनाई जा रही है, नेताओं, नौकरशाहों और ठेकेदारों की तिकड़ी के भ्रष्टाचार से बनने वाले पुल उद्घाटन के साथ ही टूट रहे हैं। सड़के पहली ही बारिश में धंस रही हैं, बाँध टूट रहे हैं, भवनों की छतें पहली ही बारिश में टपक रही हैं। सच्चाई यह है कि स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं और सरकारी विभागों में लाखों पद खाली पड़े हैं।
माकपा नेताओं जसविंदर सिंह, प्रमोद प्रधान, बादल सरोज, पूषन भट्टाचार्य, पीएन वर्मा आदि का मानना है कि प्रदेश पर कर्ज के बोझ का बड़ा हिस्सा भाजपा नेताओं, मंत्रियों, अधिकारियों और दलालों की तिजोरियों में कैद हो गया है। भविष्य में भी भाजपा प्रदेश को और अधिक कर्ज में धकेल रही है। अंतत: प्रदेश की जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से ही इस कर्ज के बोझ को उतारा जाएगा।