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गुना मंडी में अराजकता: गेहूं के भाव में अचानक भारी गिरावट से बिफरे किसानों ने एबी रोड पर लगाया घंटों जाम

  • लंबी छुट्टियों के बाद मंडी खुलने पर दो हजार से ज्यादा ट्रैक्ट्र-ट्राली में गेहूं लेकर पहुंचे किसानों में दाम गिरने से मची अफरा तफरी

  • जाम नहीं खुलने और किसानों के लगातार हंगामा करने के बाद पुलिस ने किया बल प्रयोग और किसानो को दौड़ा-दौड़ाकर मौके से भगाया

गुना। लंबी छुट्टियों के बाद सोमवार को खुली गुना कृषि उपज मंडी में हालात उस समय बेकाबू हो गए जब उपज की बंपर आवक और गेहूं के गिरते दामों ने किसानों के सब्र का बांध तोड़ दिया। अपनी मेहनत की फसल का वाजिब दाम न मिलने से आक्रोशित हजारों किसान सडकों पर उतर आए और हनुमान चौराहे के पास एबी रोड पर चक्काजाम कर दिया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को प्रदर्शनकारी किसानों को दौड़ा-दौड़ाकर सडक से खदेडा पड़ा, तब कहीं जाकर घंटों से बाधित यातायात सुचारू हो सका।



जानकारी के अनुसार मंडी प्रांगण, बीज निगम एवं दशहरा मैदान में लगभग दो हजार से अधिक टे्रक्टर-ट्रॉली लगे हुए हैं। मंडी सचिव आरपी सिंह के अनुसार सोमवार को लगभग 575 टे्रक्टर-ट्रॉली की 25000 बोरी से अधिक उपज की डाक हुई। मंडी में विवाद की मुख्य वजह गेहूं के भावों में आई अचानक गिरावट रही। किसानों का आरोप है कि जो गेहूं शनिवार को 2600 से 3200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था, सोमवार को व्यापारियों ने उसकी बोली महज 2200 से 2600 रुपये के बीच लगाना शुरू कर दी। करोंद निवासी किसान महादीप रघुवंशी सहित अन्य अन्नदाताओं का कहना था कि व्यापारी जानबूझकर सिंडिकेट बनाकर भाव गिरा रहे हैं। जब व्यापारियों ने 2000 रुपये के आधार मूल्य से बोली उठाना शुरू किया, तो किसानों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने नीलामी रोककर हाईवे पर जाम लगा दिया।


ट्रालियों की मीलों लंबी लाइन और जाम हटवाने पुलिस ने की सख्ती

चक्काजाम की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। हाईवे पर ट्रॉलियों की मीलों लंबी कतारों और बढ़ते हंगामे को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब किसान सडक से हटने को तैयार नहीं हुए, तो पुलिस ने सख्ती बरतते हुए उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर खदेड़ा और बलपूर्वक सडक से हटाया। इस कार्रवाई के दौरान अफरा-तफरी मच गई और कुछ किसानों ने पुलिस पर मारपीट के गंभीर आरोप भी लगाए। किसानों का कहना है कि उनकी समस्या सुनने के बजाय उन्हें अपराधियों की तरह खदेड़ा गया, जिससे उनमें भारी रोष है।



जाम खुलने के बाद पुलिस कंट्रोल रूम में हुई हाई वोल्टेज मीटिंग

जाम खुलने के बाद एसडीएम शिवानी पांडे, तहसीलदार जीएस बैरवा और मंडी सचिव आरपी सिंह की मौजूदगी में पुलिस कंट्रोल रूम पर व्यापारियों और किसान प्रतिनिधियों की हाई-वोल्टेज बैठक हुई। एसडीएम ने साफ किया कि भाव बाजार और उपज की गुणवत्ता (नमी और चमक) के आधार पर तय होते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अच्छी क्वालिटी के गेहूं को आज भी बेहतर दाम मिल रहे हैं। काफी समझाइश और आसपास की मंडियों के भावों के मिलान के बाद, किसान इस बात पर सहमत हुए कि क्वालिटी के हिसाब से ही दाम तय किए जाएंगे। मंडी प्रांगण की क्षमता से अधिक आवक होने के कारण हजारों ट्रॉलियां सडकों पर खड़ी रहीं।


वैकल्पिक व्यवस्था में परेशानियों के कारण भड़क गए किसान

प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर दशहरा मैदान और बीज निगम की जमीन पर ट्रॉलियों को पार्क कराया। हालांकि, शनिवार से कतार में लगे किसानों ने मंडी प्रशासन को कोसते कहा कि यहां न तो पीने के पानी की व्यवस्था है, न ही सिर छुपाने की जगह। रातभर मच्छरों और भूख-प्यास से जूझने के बाद जब दाम कम मिले, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। फिलहाल, भारी पुलिस सुरक्षा के बीच मंडी में डाक (नीलामी) प्रक्रिया दोबारा शुरू करा दी गई है, लेकिन किसानों और पुलिस के बीच हुई झड़प की चर्चा पूरे शहर में बनी हुई है।


क्वालिटी के हिसाब से गेहूं के भाव तय हो रहे हैं: एसडीएम शिवानी पांडे

एसडीएम शिवानी पांडे ने कहा कि भाव से नाराज होकर किसानों ने जाम लगाया था। जिस पर हमने किसान और व्यापारियों की की बैठक कराई। जिसमें निष्कर्ष निकला कि जो गेहूं जिस क्वांलिटी का है उस हिसाब से रेट तय हो रहा है। जो अच्छी क्वांटिली की उपज है उनका दाम आज भी अच्छा है। अब किसान संतुष्ठ हैं जो मंडी में भी डाक सुचारू रूप से चल रही है। आज मंडी में टे्रक्टर-ट्रॉली भी अधिक हो गए थे। जिनकी तीन जगह ठहरने की व्यवस्था की गई है।


मंडी परिसर में जगह कम होने से बीज निगम परिसर में ट्राली रुकवाई

मंडी सचिव आरपी सिंह ने कहा कि मंडी प्रांगण की क्षमता तो कम है। इसलिए गेहूं के वाहनों को दशहरा मैदान एवं बीज निगम की जमीन में लगवाया जा रहा है। वहां पर लाईट, टेंट, पानी का टेंडर के अलावा चलित प्याऊ की व्यवस्था वहां की गई है। किसानों के ज्यादा संख्या में वाहन आने के कारण जाम लगाया था। यातायात प्रभारी और मैंने जाम खुलवाया। वहां से टे्रक्टरों को बीज निगम की जमीन पर व्यवस्थित लगवाएं हैं।