- रात में बाघों के दहाड़ने के बाद चौकस वन अमले ने की गश्त
- बाघ शावक के शव का कराया गया दो डॉक्टरों से पोस्टमार्टम
- नर एवं मादा बाघ के पंजों के निशान मिलने से संघर्ष की पुष्टि
सोहागपुर (नर्मदापुरम)। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) में एक बाघ शावक का शव मिला है। वन महकमे ने दावा किया है शावक की मौत बाघों के आपसी संघर्ष में हुई है। इसके पूर्व देलाखाड़ी के ग्राम सांगाखेड़ा में जहर देकर 4 साल के बाघ को मार ड़ाला गया, तो वहीं उससे भी पहले मढ़ई के पास नदी में बाघ का शव मिल चुका है।
एसटीआर के वन परिक्षेत्र मटकुली अंतर्गत बीट नयाखेड़ा के कक्ष क्रमांक-460 में रविवार सायंकाल दो बाघों के दहाड़ने की तेज आवाजें दूर-दूर तक सुनाई दे रही थीं। इसकी सूचना मिलते ही वनरक्षक नयाखेड़ा, परिक्षेत्र सहायक एवं अन्य सहयोगी वन अमले द्वारा क्षेत्र में गश्ती को बढ़ाया गया। इसके बाद रात में ही बाघों के भिड़ंम वाले इलाके में पहुंचने पर एक बाघ शावक मृत अवस्था में पाया गया।
रविवार सुबह मिले आपसी संघर्ष के स्पष्ट साक्ष्य
रात में घना अंधेरा होने के कारण संघर्ष स्थल की निगरानी की गई और रविवार सुबह विस्तृत निरीक्षण किया गया। इसमें बाघों के आपसी संघर्ष के स्पष्ट साक्ष्य मिले और शावक का शव बरामद किया गया। घटनास्थल के आसपास गहराई से की गई छानबीन में अन्य बाघों के भी साक्ष्य मिले। मौके पर नर एवं मादा बाघ के पदचिह्न मिलने से प्रथम दूष्टया यह निष्कर्ष निकाला गया है कि शावक की मौत बाघों के आपसी संघर्ष मे हुआ है।

डॉक्टरों की टीम ने किया बाघ का पोस्टमार्टम
क्षेत्र संचालक राखी नंदा, सहायक संचालक (पिपरिया एवं पचमढ़ी) आशीष खोबरागड़े, तहसीलदार पिपरिया तथा एनटीसीए के प्रतिनिधि की उपस्थिति में निर्धारित एसओपी के तहत कार्रवाई पूरी की गई। शावक का पोस्टमार्टम डॉ. गुरुदत्त शर्मा (सतपुड़ा टाइगर रिजर्व) एवं डॉ. अमित ओढ़ (रातापानी टाइगर रिजर्व) द्वारा किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि लगभग चार माह के इस शावक की मृत्यु किसी अन्य मांसाहारी वन्यजीव, संभवत: बाघ, के हमले से हुई है। शावक के शरीर पर चोट के स्पष्ट निशान पाए गए हैं।
बाघ ने अकेले शावक पर किया हमला, बचाने में मां को हुई देर
मौके पर स्पष्ट साक्ष्य मिले हैं, जिनसे पुष्टि होती है कि शावक अपनी मां से बिछड़ गया होगा या दूर चला आया था। इसी दौरान नर बाघ ने उस पर अटैक कर दिया, जिसकी आवाज सुनकर मदर अपने शावक को बचाने आई होगी और आपसी संघर्ष हुआ। शावक के शरीर पर मिले चोटों के निशान से भी बडेÞ बाघ के हमले की पुष्टि होती है। शावक का पीएम करवाने के बाद नियमानुसार दाह संस्कार किया गया है।
-राखी नंदा, फील्ड डायरेक्टर, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व