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कैदी के सुसाइड नोट में वसीयत-मुझे हत्या के मामले में फंसाया गया...मेरी लाश को न जलाना न दफनाना, मेडिकल कालेज को दान कर देना

  • भोपाल जेल में पंप हाउस में और जबलपुर जेल में बाथरुम में कैदियों ने अलग-अलग फांसी लगाकर की आत्महत्या

जबलपुर/ भोपाल।
सोमवार का दिन मध्यप्रदेश के जेल महकमे के लिए हादसे वाला साबित हुआ। सुबह सेंट्रल जेल जबलपुर में और फिर शाम होते-होते सेंट्रल जेल भोपाल में कैदियों ने फांसी लगा ली। जहां जबलपुर में मौत को गले लगाने वाले कैदी ने सुसाइड नोट में लिखा है कि उसकी डेड बॉडी को न दफनाया जाए न जलाया जाए, बल्कि मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया जाए। वहीं भोपाल जेल के पंप हाउस में फांसी लगाने वाले कैदी की मौत रहस्य बन कर रह गई है।
 


जेल प्रशासन के अनुसार नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय कारागार जबलपुर में हत्या के मामले में 16 अगस्त 2024 से विचाराधीन बंदी गुड्डू उर्फ राजा विश्वकर्मा 60 साल निवासी सार्इं कॉलोनी संजीवनी नगर जबलपुर ने अस्पताल वार्ड नंबर 3 के बाथरूम में सोमवार सुबह फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इसकी सूचना जेल अधीक्षक मदन कमलेश ने सिविल लाइन थाने को दी गई, जिसके बाद पुलिस ने शव का पीएम के लिए भिजवाया गया। इसके साथ ही बंदी के परिजन को सूचना देकर बुलाया गया। जांच में बंदी का सुसाइड नोट मिला है, जिसमें बंदी ने अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है, बस अपनी बीमारी का जिक्र किया है। कैदी ने लिखा है कि उसको हत्या के मामले में झूठा फंसाया गया। कैदी ने अपने शव को दफनाने या जलाने से मना करते हुए मेडिकल कॉलेज में दान देने का लिखा है।

बीमारी के कारण अस्पताल के वार्ड-3 में भर्ती था

तबीयत खराब होने के कारण बंदी राजा विश्वकर्मा को अस्पताल वार्ड नंबर 3 में भर्ती कराया गया था। जिसका इलाज चल रहा था। सोमवार सुबह लगभग 8 बजे वह अस्पताल के बाथरूम में गया और बहुत देर तक बाहर नहीं आया, जब अन्य बंदियों ने दरवाजा खोला, तो देखा कि बंदी राजा विश्वकर्मा फांसी पर लटका हुआ है। जिससे उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बंदी राजा के साथ उस अस्पताल वार्ड में 22 बंदी और भर्ती थे, उन बंदियों से वह सुबह तक बातचीत करता रहा, इसके बाद वार्ड में सफाई करने वाला पहुंचा और सफाई होना शुरू हुई, इसी दौरान नाश्ता भी वार्ड में पहुंचा, जहां बंदी राजा ने नाश्ता किया और टॉवल लेकर बाथरूम में चला गया, जहां उसने टॉवल से ही फांसी लगा ली। उसने ऐसा कदम क्यों उठाया इसकी जांच की जा रही है।

पंप हाउस बंद करने गया और झूल गया

भोपाल सेंट्रल जेल में हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहा गुड्डा आदिवासी पिता बल्ला, 55 साल, निवासी बल्ला आदिवासी, बाड़ी, जिला रायसेन को 2017 में जेल दाखिल किया गया था। कैदी के अच्छे आचरण के चलते ही गोशाला में काम करता था, दूध निकालना, ट्रैक्टर चलाना, पंप हाउस संभालना उसका काम था। सोमवार को सारे काम निपटाने के बाद शाम को जब बाहर काम करने वाले कैदी नहाने लगे तो गुड्डू आदिवासी भी उनके साथ ही नहाया, इसके बाद पंप हाउस गया, ताकि मोटर बंद कर सके। ऐसा वह रोज करता था। हालांकि सोमवार शाम को पंप हाउस गया और नहीं लौटा तो देर होने पर दूसरे कैदियों ने जाकर देखा तो फांसी पर झूल रहा था। इसके बाद गांधी नगर थाने को सूचना दी गई, जिसके बाद शव को फांसी से उतार कर पीएम के लिए भिजवाया गया।
 


सजा होते ही पत्नी छोड़ गई, सिर्फ एक बेटी ही बची थी

सेंट्रल जेल भोपाल के जेल अधीक्षक राकेश भांगरे के अनुसार मृतक गुड्डा आदिवासी के परिवार में सिर्फ बेटी है, जो एक-दो बार मिलने आई थी। कोई परिवार में नही था, जिससे उसकी पेरोल भी कभी नही हो पाई। सूत्रों के अनुसार मृतक बंदी को जब उम्र कैद की सजा सुनाई गई तो उसके कुछ ही दिन बाद उसकी पत्नी उसकी मासूम बेटी को छोड़कर चली गई और किसी दूसरे के साथ अपना घर बसा लिया था। ऐसे में किसी तरह उसकी बेटी ही बची थी, जिसे रिश्तेदारों और आसपास के लोगों ने किसी तरह पाला-पोसा था। ऐसे में बेटी किसी तरह एक-दो बार ही मिलने आ पाई थी।

 दोनो ही मामलों में जांच शुरु,  फिलहाल कोई नकारात्मक या संदिग्ध तथ्य सामने नहीं आया 

भोपाल जेल में कैदी ने सामान्य हालातों में दिनचर्या के बाद शाम को पंप हाउस बंद करने गया और अचानक ही फांसी लगा ली। वहीं जबलपुर जेल में बीमार चल रहे बंदी ने इलाज जारी रहने के दौरान ही वार्ड-3 के बाथरुम में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। दोनो ही मामलों में जांच शुरु हो गई है। फिलहाल कोई नकारात्मक या संदिग्ध तथ्य सामने नहीं आया है।

-संजय पांडे,
महानिरीक्षक, मध्यप्रदेश जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं