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सैफ खेलों में भारतीय वुशु टीम का प्रतिनिधित्व करेंगी भूरक्षा; 5 साल पहले पढ़ाई के लिए छोड़ा था खेल


अशोकनगर। यह कहानी जिले के उन अभिभावकों के साथ बच्चों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो कहते हैं कि खेलों से पढ़ाई प्रभावित होती है। लेकिन इसके विपरीत जिले की पहली वुशु महिला अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अपनी मेहनत से इसे नकारते हुए खेल में अव्वल रहने के साथ पढ़ाई में भी अव्वल रही। इसी मेहनत और लगन के कारण इस वर्ष दिसम्बर में 8 देशों की दक्षिण एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। पेश में बाल दिवस पर जिले की एक बालिका ने खुद बताई अपनी कहानी।

हाल ही में 8 देशों की दक्षिण एशियाई खेलों के लिए भारतीय वुशु टीम का चयन किया गया। इसमें शहर की बेटी भूरक्षा दुबे का चयन हुआ है। वर्ष 2008 में संगीत शिक्षा लेने के दौरान ही पड़ोसी वुशु खिलाड़ी श्रेया गुप्ता के साथ पहली बार वुशु खेलने आई तो उनके प्रशिक्षक बृजेश धुरेंटे को समझते देर नहीं लगी कि यह उनके तरकस में आया यह तीर एक दिन जरूर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन करेगा।

भूरक्षा ने बताया कि उन्होंने इंग्लिश मीडियम स्कूल में एडमिशन लेने के साथ ही दिन में सिर्फ दो घंटे प्रेक्टिस की। सुविधाओं का अभाव, आर्थिक परेशानी सहित दूसरे खेलों के लोगों ने कहा भी कि वुशु की मान्यता नहीं है इसे मत खेलों नहीं तो बर्बाद हो जाओगे। लेकिन खेल के प्रति लगन और मेहनत के बल पर 2009 में केरल में रजत पदक जीतने के बाद 10 सालों में ऐसी कोई प्रतियोगिता नहीं बची जिसमें स्वर्ण पदक न जीता हो। इसके साथ ही भूरक्षा लगातार पढ़ाई में भी अव्वल आती रहीं। जहां वर्ष 2014 में हाईस्कूल में 84 प्रतिशत अंक प्राप्त किए तो वहीं 2016 हायर सेकंडरी में 89 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।

भूरक्षा ने बताया कि दोनों समय 3.5 घंटे की प्रेक्टिस के लिए सुबह 5 बजे उठना पड़ता है। वहीं प्रेक्टिस के बाद थकान भी होती है। इसके बाद भी वह नींद आने के बाद हर दिन नियमित दो घंटे पढ़ाई करती हैं। इसी आदत की वजह से पढ़ाई के साथ आज वह खेल में भी अव्वल है।

भूरक्षा ने बताया कि जब 2014 में वह मिनी वर्ल्ड चैम्पियन के लिए इंडिया के कैंप में प्रशिक्षण ले रही थीं उसके एक माह बाद भी हाईस्कूल की परीक्षा थी। दोनों समय लगातार प्रशिक्षण से थकने के बाद भी रात को मोबाइल पर उनके पिता आनंद मोहन दुबे पढ़ाते थे। लेकिन हाईस्कूल परीक्षा के दो दिन पहले ही साल खराब होने के डर से भूरक्षा परीक्षा देने आ गईं। इस वजह से उनका प्रतियोगिता में चयन नहीं हुआ। लेकिन इस वर्ष दक्षिण एशियाई खेल में वह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।

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