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दोषी पवन के पिता की याचिका पर सुनवाई, कोर्ट ने कहा- गवाह की विश्वसनीयता बाहरी बयानों से तय नहीं होती


नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप मामले के इकलौते गवाह के खिलाफ दायर याचिका पर शनिवार को दिल्ली की निचली अदालत ने सुनवाई की। दोषी पवन के पिता हीरालाल गुप्ता ने याचिका में दावा किया है कि गवाह ने रिश्वत लेकर चैनलों को इंटरव्यू दिया, जिससे मामले की सुनवाई प्रभावित हुई। इस केस में पीड़िता का दोस्त ही एकमात्र गवाह है, जो घटना के समय बस में मौजूद था। कोर्ट ने कहा कि गवाह की विश्वसनीयता कोर्ट के बाहर उसके बयानों के आधार पर तय नहीं की जा सकती है।

मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार सिरोही ने कहा, ‘‘गवाह कोर्ट में शपथ लेकर अपना बयान दर्ज कराते हैं, वे कोर्टरूम से बाहर क्या कहते हैं इससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल नहीं किए जा सकते। आपकी शिकायत में किस संज्ञेय अपराध का उल्लेख है? 20 दिसंबर को अगली सुनवाई में याचिका स्वीकार करने पर विचार करेंगे।’’
दोषियों की सजा पर आगे क्या होगा?
दिल्ली सरकार ने सभी चार दोषियों की दया याचिका 4 दिसंबर को खारिज कर दी थी। इसके बाद गृह मंत्रालय ने दया याचिका राष्ट्रपति को भेज दी। अब राष्ट्रपति के फैसले पर सब-कुछ निर्भर है। अगर वे दया याचिका खारिज कर देंगे तो सभी दोषियों को फांसी दे दी जाएगी। दोषियों में से एक अक्षय ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की। एक अन्य दोषी विनय शर्मा ने अपनी दया याचिका वापस लेने की मांग की। उसने दावा किया था कि याचिका पर उसके हस्ताक्षर नहीं है।
2012 में निर्भया से बस में गैंगरेप हुआ था 
दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 की रात 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ चलती बस में गैंगरेप हुआ था और दोषियों ने उसके साथ अमानवीय तरीके से मारपीट की थी। छात्रा ने 29 दिसंबर 2012 को दम तोड़ दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दोषी मुकेश, पवन, विनय और अक्षय को फांसी की सजा सुनाई थी। एक अन्य दोषी रामसिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी।

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