भोपाल। मध्य प्रदेश में कोरोना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा सरकार पर उठाये गए सवालों पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पलटवार किया है। सीएम ने कहा कमलनाथ को जब उनको कोरोना के बारे में मीटिंग लेना चाहिए थी तब वह आईफा अवार्ड का कार्यक्रम इंदौर में कैसे संचालित हो, इसके बारे में मीटिंग ले रहे थे। आज कमलनाथ की सरकार होती तो प्रदेश की वही दुर्दशा हो रही होती, वही स्थिति होती जो आज अमेरिका की है।
सीएम शिवराज सिंह ने कहा 30 जनवरी को भारत में पहला कोरोना पॉजिटिव केस केरल में आया था और 30 जनवरी के तत्काल बाद से ही सारे देश में कोरोना से निपटने के लिए क्या व्यवस्थाएं हो सकती हैं इसके बारे में सभी राज्य सरकारों ने अपने प्रयास अपने अपने स्तर पर किए थे, लेकिन दुर्भाग्य से जो कमलनाथ जी की सरकार में जब उनको कोरोना के बारे में मीटिंग लेना चाहिए थी तब वह आईफा अवार्ड का कार्यक्रम इंदौर में कैसे संचालित हो, इसके बारे में मीटिंग ले रहे थे।
उन्होंने कहा 17 फरवरी, 27 फरवरी को स्वयं मुख्यमंत्री ने आइफा के बारे में इंदौर के प्रशासनिक अधिकारियों की मीटिंग ली और निर्देशित किया कि वह डेली कॉलेज जा कर के अन्य होटल वगैरह जा करके, उनका भ्रमण करें और देखें कि जो अतिथि आएंगे उनके रुकने की व्यवस्था ठीक है या नहीं है। वह समय था जब कमलनाथ को इंदौर की हॉस्पिटल्स का इंस्पेक्शन कराना था, वहां पर्याप्त संख्या में डॉक्टर है कि नहीं इसके बारे में प्रयास करना था, वहां पर मेडिकल फैसिलिटी से जुड़े अन्य ईक्विपमेंट है वह उपलब्ध है कि नहीं, इसके बारे में प्रयास करना चाहिए था और ये वो समय था कि जब ये आईफा के बारे में मीटिंग ले रहे थे।
शिवराज ने कहा स्वयं चीफ सेक्रेटरी इंदौर में आईफा की तैयारियों को देखने के लिए इंदौर भ्रमण करते हैं और जाकर की मीटिंग लेते हैं। यह बात है जबकि देश के अंदर कोरोनावायरस आ चुका था तो इतनी गैर संवेदनशील जिन लोगों की कार्यप्रणाली रही हो और वह अगर आज किसी बात पर प्रश्न खड़ा करते हैं तो यह एक चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कमलनाथ जिनकी सारी सेना थी, चीफ सेक्रेटरी थे, जो भी आज नेता का काम कर रहे है जो वास्तव में अधिवक्ता है तो ऐसे सब लोगों ने मिलकर 15 महीने में इस मध्य प्रदेश को एक कमीशन खोरी का, एक भ्रष्टाचार का, दलाली का अड्डा कैसे बने इसके बारे में कोई कसर नहीं छोड़ी। फरवरी के अंतिम सप्ताह से लेकर के 20 मार्च तक यह क्रूशियल टाइम था कि जब करोना को हैंडल करने के बारे में कुछ कारगर प्रयास हो सकते थे, तब कमलनाथ जी की सरकार क्या कर रही थी? तब कमलनाथ जी की सरकार मध्य प्रदेश में स्ट्रेटरी पदों पर जो संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों के बारे में व्यस्त थे, ट्रांसफर की फ़ाइल बना कर लगातार ट्रान्सफर आदेश जारी हो रहे थे द्य
सीएम ने कहा जब मध्य प्रदेश में मेडिकल ईक्विपमेंट आने चाहिए थे, किट की सप्लाई होनी चाहिए थी , हो सकता है कि ये शायद कमीशन वगैरह सेट करने में लगे रहे हो और इसलिए उन्होंने इस प्रकार की कोई तैयारियां, कुछ मामला फाइनल सेट नहीं हुआ होगा इसलिए कोई तैयारियां की नहीं। स्वयं चीफ सेक्रेटरी जो 20 दिन पहले अपने पद से रिजाइन करके सेवानिवृत्ति के पहले इस संकट के समय में रिजाइन करके चले जाएं, मुख्यमंत्री उनको रोकते नहीं है और एक नए व्यक्ति को चीफ सेक्रेटरी बना देते हैं, तब ये जो वकील साहब है उनको ये नहीं लगा कि चीफ सेक्रेटरी बदल रहा है कोरोना संकट के समय में।
उन्होंने कहा ये तो भाग्य है कि मध्यप्रदेश कि आज यहां पर शिवराज सिंह चौहान जैसा मुख्यमंत्री है। वीडी शर्मा जैसा नेता भाजपा का नेतृत्व कर रहा है। और इकबाल सिंह बैंस जैसा ईमानदार व्यक्ति चीफ सेक्रेटरी के पद पर काम कर रहा है। ये मां नर्मदा, महाकाल की कृपा है मध्यप्रदेश पर कि आज नेतृत्व में इस प्रकार का परिवर्तन हुआ है कि आज कमलनाथ की सरकार होती तो प्रदेश की वही दुर्दशा हो रही होती। वही स्थिति होती जो आज अमेरिका की है।
