भोपाल। मप्र 15 अप्रैल से गेहूं की खरीदी शुरू हो गई है। लेकिन किसानों को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी परेशानी यह सामने आई है की पोर्टल पर किसानों के रकबे की गलत जानकारी भरी गई है। जब किसान अपनी उपज लेकर उपार्जन केंद्र पहुंचता है तो उसकी थोड़ी उपज ही खरीदी जाती है। इससे किसानों में रोष है।
प्रदेशभर में भोपाल, इंदौर और उज्जैन को छोड़कर सभी जिलों के 4,305 खरीदी केंद्रों पर खरीदी का काम चल रहा है। लॉकडाउन की वजह से खरीदी की प्रक्रिया में कुछ बदलाव लाए गए हैं, जिससे प्रदेश के लगभग हर जिले से किसानों की परेशानियां सामने आ रही है। लॉकडाउन की वजह से सरकार ने खरीदी केंद्रों पर भीड़-भाड़ कम रखने का प्रबंध किया है और इसके तहत पहले चुनिंदा छोटे किसानों को एसएमएस के जरिए बुलाया जा रहा है। इन किसानों की गेहूं की खरीदी की सीमा तय की जाती है। हालांकि, रिकॉर्ड में खामी होने की वजह से कई स्थानों पर बड़े किसान अपनी पूरी फसल नहीं बेच पा रहे हैं।
प्रदेशभर में भोपाल, इंदौर और उज्जैन को छोड़कर सभी जिलों के 4,305 खरीदी केंद्रों पर खरीदी का काम चल रहा है। लॉकडाउन की वजह से खरीदी की प्रक्रिया में कुछ बदलाव लाए गए हैं, जिससे प्रदेश के लगभग हर जिले से किसानों की परेशानियां सामने आ रही है। लॉकडाउन की वजह से सरकार ने खरीदी केंद्रों पर भीड़-भाड़ कम रखने का प्रबंध किया है और इसके तहत पहले चुनिंदा छोटे किसानों को एसएमएस के जरिए बुलाया जा रहा है। इन किसानों की गेहूं की खरीदी की सीमा तय की जाती है। हालांकि, रिकॉर्ड में खामी होने की वजह से कई स्थानों पर बड़े किसान अपनी पूरी फसल नहीं बेच पा रहे हैं।
-उत्पादन 20 क्विंटल बिक्री डेढ़ क्विंटलआलम यह है कि एसएमएस मिलने के बाद जब किसान खरीदी केंद्र पहुुंच रहे हैं तो उनकी पूरी उपज नहीं खरीदी जा रही है। ऐसी ही परेशानी आई बीना के धमना ग्राम निवासी किसान राम प्रसाद को। उन्हें समर्थन मूल्य पर खरीदी का मेसेज मिला और वह 20 क्विंटल गेहूं लेकर बिहराना स्थित खरीदी केंद्र पर पहुंचे। वहां उन्हें पता चला कि सिर्फ 25 डिसमिल खेती का उनका रिकॉर्ड है और सिर्फ डेढ़ क्विंटल गेहूं बेच सकते हैं। गेहूं न बिकने की वजह से उसे गांव से केंद्र तक लाने में लगा ढुलाई का पैसा भी डूब गया। सीहोर के किसान रूप नारायण वर्मा का कहना है कि अफसरों ने मुझसे बिना पूछे मेरे गेहूं के रकबे की जानकारी पोर्टल पर फीड कर दिया है। मैं जब खरीदी केंद्र अपनी उपज लेकर पहुंचा तो आधी उपज भी नहीं खरीदी गई। वह कहते हैं कि अफसरों की कारस्तानी का खामियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है। राम प्रसाद और रूप नारायण जैसे कई किसानों को प्रदेशभर में ऐसी परेशानी आ रही है।
-उपज को गुणवत्ताहीन बताकर खरीदने से इनकारकई जगह ऐसी भी शिकायतें आई हैं कि किसानों की उपज को गुणवत्ताहीन बताकर वापस लौटा दिया गया। हरदा जिले के ग्राम रिछाडिय़ा की बुजुर्ग महिला रुक्मिणी पति नर्मदा प्रसाद की उपज को गुणवत्ताहीन बताकर खरीदने से इनकार कर दिया गया। महिला सुबह 10 बजे से लेकर 3 बजे तक केंद्र पर अधिकारियों से गुहार लगाती रही। काफी मशक्कत के बाद अधिकारियों ने गेहूं की सफाई कर दोबारा लाने को कहा। विदिशा जिले के किसान कार्यकर्ता राजकुमार बघेल ने बताया कि उनके जिले में हाल में हुई बेमौसम बारिश ने गेहूं की चमक खत्म कर दी है। दयानंदपुर खरीदी केंद्र में कई किसान अपना अनाज बेचने पहुंचे थे, इनमें से करीब छह किसानों का गेहूं चमक चली जाने के कारण नहीं खरीदा गया और उन्हें अनाज लेकर केंद्र से लौटना पड़ा। हालांकि, शिकायत के बाद स्थानीय अधिकारियों ने कुछ किसानों को दोबारा बुलाकर उनकी फसल खरीदी।
-नहीं जा रहे खरीदी केंद्रखरीदी केंद्रों पर किसानों के साथ की जा रही मनमानी और समस्याओं को देखते हुए कई बड़े किसान अपनी फसल बेचने केंद्रों तक नहीं पहुंच रहे हैं। छतरपुर के किसान देवेंद्र मिश्रा कहते हैं कि उनके परिवार में इसबार 100 क्विंटल के करीब गेहूं का उत्पादन हुआ है लेकिन तमाम समस्याओं को देखते हुए वह खुले बाजार में ही गेहूं बेचेंगे। देवेंद्र बताते हैं कि पिछले वर्ष समर्थन मूल्य पर चने की खरीदी हुई थी और उन्होंने इस वर्ष 80 क्विंटल चना उपजाया है। हालांकि, इस वर्ष अभी तक सिर्फ गेहूं की खरीदी हो रही है। खुले बाजार में चने की अच्छी कीमत नहीं मिल पाएगी।