बेगमगंज। विद्या भारती मध्यभारत प्रांत द्वारा 5 दिवसीय सेमिनार के समापन अवसर पर मुख्य वक्ता डाॅ. मधुश्री संजीव सावजी राष्ट्रीय मंत्री, विद्या भारती (मनोचिकित्सक, औरंगाबाद महाराष्ट्र) ने मातृशक्ति(महिला) को ’’ घर ही बच्चों की प्रथम पाठशाला ’’ विषय पर प्रबोधन दिया ।
प्रांत प्रमुख डाॅ. रामकुमार भावसार ने बताया कि विद्या भारती मध्यभारत प्रांत द्वारा ग्रीष्म अवकाश में होनेे वाले विभिन्न वर्गो का इस वर्ष लाॅकडाउन में आयोजित न होने के कारण पंाच दिवसीय ई प्रबोधन वर्ग का आयोजन किया गया जिसमें प्रथम दिवस प्राचार्य, प्रधानाचार्य जिन्हें विद्या भारती के राष्ट्रीय मंत्री अवनीश भटनागर ने वैश्विक चुनौती और हमारी भूमिका, द्वितीय दिवस विद्या भारती के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीराम आरावकर ने प्रबंध समितियों के पदाधिकारियों को शिशु मंदिर योजना और हमारी भूमिका, तृतीय दिवस विद्या भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप वेतकेकर ने अभिभावकों को सम्बोधित करते हुए बच्चों की सृजनशीलता निर्माण में परिवार के योगदान , चतुर्थ दिवस प्रसिद्ध कथावाचक पं. श्यामस्वरुप मनावत ने संस्कार हमारी पारिवारिक परम्परा अभिभावकों को सम्बोधित किया तथा अंतिम एवं समापन दिवस डाॅ. मधुश्री सावजी ने प्रांत की मातृशक्ति को सम्बोधित किया ।
डाॅ. मधुश्री ने कहा कि है कबीर, बिरसामुण्डा, मातृशक्ति जागरण,लक्ष्मीबाई 1857 की बीरांगना, डाॅ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी आदि के स्मरण का अवसर मिला। मैंने ई प्रबोधन में पूर्व के चार वक्ताओं को सुना है। सभी का उद्बोधन प्रेरक रहा, आज की परिस्थिति कोरोना काल में साईकिल से 1200 कि.मी. पिता को लेकर यात्रा करने वाली बेटी को किसी भाषण की आवश्यकता नहीं है। पाठशाला,गुरूकुल एवं घर पहले तीन शब्द आते थे,परन्तु अब घर एवं पाठशाला ही आते हैं । आचार्य, दीदी,सेवक वर्ग का बच्चों को सिखाने हेतु प्रशिक्षण होता है। शिशुु का भवन माॅं की अनमोल गोद होती है। यही से उसकी पाठशाला शुरु हो जाती है। शिशु गर्भ से बाहर आकर घर की पाठशाला में प्रवेश करता है। इस पाठशाला में गुरू कौन, और शिष्य कौन होता है। गतिवान युग में 6 वर्ष का बेटा नानी का गुरू बन जाता है। सामान्यतः घर में माता-पिता ही गुरू होते है। बच्चों में आत्मविश्वास,आनन्द,सुरक्षा घर की पाठशाला में रहता है। मन की सुरक्षा, शरीर की सुरक्षा, प्रेम का लेना-देना महत्वपूर्ण है। विश्वास भी है-यह घर हमें स्वीकार कर लेगा। विश्वास की दृढ़ता पर घर की पाठशाला अच्छी होती है।
सेमिनार के अंतिम दिवस का शुभारंभ कांतीलाल चतर प्रांतीय अध्यक्ष ग्राम भारती शिक्षा समिति, भोपाल ने दीप प्रज्जवलन कर किया। प्रबोधन वर्ग का संचालन पिंकेशलता रघुवंशी (सदस्य, प्रांतीय समिति) ने किया एवं सरस्वती वंदना सरस्वती शिशु मंदिर, व्यक्तिगत गीत सौ.रेखा भदौरिया(प्रसिद्ध कवियत्री, ग्वालियर) ने वाचन का किया। ई प्रबोधन वर्ग में प्रांत के प्रधानाचार्य, प्राचार्य, विद्यालय संचालन समिति, अभिभावक तथा मातृशक्ति की सहभागिता रही।
