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बरेली में असंख्य गड्ढे और धूल का गुबार जनता कर रही हा हा कार

बरेली। सरकारें बदलती रही परन्तु नगर की जनता को रोड के गड्ढों और मुक्ति नहीं मिल पाई इस मुद्दे को लेकर नगर के जनप्रतिनिधियों समेत आम जनता सामाजिक संगठन आदि सारे प्रयास करके हाथ पर हाथ धरे बैठे रह गए बदले में मिला सिर्फ आश्वासन सरकारें बदली पर नही बदली तस्वीर - कांग्रेस के साशन काल मे भाजपा इस मुद्दे को उछालती रही पर अब सत्ता में आने पर भी कोई सुधार नही हुआ। एक समय रायसेन जिले से तीन मंत्री रामपाल सिंह राजपूत , सुरेंद्र पटवा , गौरीशंकर शेजवार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे परंतु एन एच 12 का रोड गड्ढा मुक्त न हो पाया। हज़ारों दुर्घटनाओं के बाद भी मिला तो सिर्फ आश्वासन । अभी कुछ दिन पहले नगर परिषद अध्यक्ष हेमंत चौधरी ने मुख्यमंत्री से इस विषय को लेकर गुहार लगाई थी परन्त नतीजा वही ढाक के तीन पात। अब तो जनता की उम्मीद ही टूटने लगी है। बार बार अधिकारियों की सुस्ती के चलते जनप्रतिनिधियों को भी नीचा देखना पड़ रहा है। ज्ञातव्य हो कि लगभग 2 साल पहले प्रभारी मंत्री अरविंद भदौरिया ने मंच से ही कलेक्टर को 1 महीने में रोड बनवाने के सम्बंध में निर्देश दिए थे । परंतु अफसरशाही के आगे सब बेबस।

धार्मिक और पुरातात्विक महत्व -- बरेली नगर के समीप प्रसिद्ध छींद मंदिर , वपोली धाम, जामगढ़, ओशो की जन्मभूमि कुचवाड़ा , माँ नर्मदा के कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घाट स्थित है । लगभग 150 बसे और 1000 प्राइवेट वाहन रोज़ यहाँ से गुजरते है। जो टूटी हुई सड़क और गड्ढों के कारण दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे है।

धूल का गुबार -- नगर में धूल का आलम ये है कि कई दुकानदार , सांस लेने में तकलीफ , फेफड़ो के संक्रमण , और आंखों के संक्रमण से ग्रसित हो रहे है। रोड पर लगने वाले चाय नाश्ते की दुकानों में धूल ही धूल चिपक जाती है जो कि बच्चों एवं वयस्कों दोनो की सेहत के लिए हानिकारक है। साथ ही दोनो समय नगर परिषद द्वारा पानी का छिड़काव करके धूल को दबाने का प्रयास किया जा रहा है जो कि नाकाफी है एवं हज़ारों लीटर पानी की बर्बादी हो रही है।

सोशल मीडिया पर मज़ाक 

अब तो नगर के लोग रोड को लेकर वीडियो , आदि बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करके अधिकारियों को जगाने का प्रयास कर रहे है। गड्ढों और धूल को लेकर लोग मनोरंजन वीडियो बनाकर मज़ाक उड़ाने में भी पीछे नही है।

टेंडर --- पिछले दिनों काफी प्रयास के बाद एक टेंडर mprdc द्वारा निकाला गया था जिसमे लगभग 7 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी । यह राशि भी ऊंट के मुह में जीरा बराबर है और यह टेंडर भी आज की दिनांक तक खुल नही पाया है। नगर के लोगों सहित अब तो जनप्रतिनिधियों ने भी बेकाबू अफसरशाही के आगे घुटने टेक दिए है।